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फ़रवरी, 24, 2026
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Darbhanga News: अब Micro Irrigation से बदलेगी किसानों की तकदीर, 35% पानी की बचत के साथ बंपर पैदावार का खुला राज

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Micro Irrigation: जैसे बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, वैसे ही बूंद-बूंद सिंचाई से न केवल खेत लहलहा उठते हैं बल्कि किसानों की तकदीर भी बदल सकती है। इसी दिशा में जाले स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य की खेती की नई तस्वीर पेश कर रहा है, जिसका समापन सफलतापूर्वक हो गया है।

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क्या है Micro Irrigation और क्यों है यह किसानों के लिए वरदान

जाले स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में ‘सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली की स्थापना एवं रखरखाव’ विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण का समापन हो गया है। इस अवसर पर केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर ने सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम की समन्वयक ई. निधि कुमारी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को पानी की बचत के साथ पैदावार बढ़ाने की आधुनिक तकनीक से अवगत कराना था।

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प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने सतही और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के बीच के अंतर को विस्तार से समझाया। किसानों को बताया गया कि कैसे नई तकनीक अपनाकर वे कम पानी में अधिक फसल ले सकते हैं। यह तकनीक न केवल फसल की पैदावार बढ़ाती है, बल्कि भविष्य के लिए जल संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। प्रशिक्षण में टपक सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन), फव्वारा विधि (स्प्रिंकलर), माइक्रो स्प्रिंकलर, रेनगन, और अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाने जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया।

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यह भी पढ़ें:  Darbhanga News: दरभंगा में कृषि का नया अध्याय! Krishi Yantrikaran Mela में किसानों पर हुई धनवर्षा, 300 को मिला परमिट

वैज्ञानिकों ने दिए खेती के आधुनिक गुर

विशेषज्ञों ने बताया कि सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली से 30 से 35 प्रतिशत तक पानी की सीधी बचत होती है, जबकि जल उपयोग की क्षमता 80 से 95 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। यह प्रणाली विशेष रूप से सब्जी, फूल और संरक्षित खेती (पॉलीहाउस फार्मिंग) के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। केंद्र के गृह वैज्ञानिक डॉ. पूजा कुमारी, उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा, प्रक्षेत्र प्रबंधक डॉ. चन्दन कुमार एवं निकरा परियोजना की वरीय वैज्ञानिक डॉ. पूजा कुमारी ने भी किसानों को वैज्ञानिक खेती के गुर सिखाए।

इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण में सिंहवाड़ा प्रखंड के 15 और जाले प्रखंड के 14 कृषकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और आधुनिक खेती की बारीकियों को समझा। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि वे कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह प्रशिक्षण किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

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