
दरभंगा, देशज टाइम्स। लनामिवि संगीत एवं नाट्य विभाग और स्पिक मैके के साथ संगीत एवं नाट्य विभाग की संयुक्त प्रस्तुति में आयोजित शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम “सोदाहरण व्याख्यान सह गायन” में गुरुवार को विशेषज्ञ के रूप में पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र की गायिकी से दरभंंगा मुग्ध हो गया। उनके साथ तबले पर संगत पं. मिथिलेश झा ने किया।
हार्मोनियम पर संगत कर रहे पंडित धर्मनाथ मिश्र और मुखर समर्थन किया स्वयं पं. साजन मिश्र के पुत्र स्वरांश मिश्र ने।
जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम का शुभारंभ उपकुलपति प्रो.डॉली सिन्हा, वित्त परामर्शी श्री कैलाश राम, विभागाध्यक्ष प्रो. पुष्पम नारायण, डीन लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ एवं सभी अतिथि कलाकारों ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
अमृता कर्मकार एवम पूजा के सरस्वती वंदना गायन के बाद विभागाध्यक्ष प्रो. पुष्पम नारायण ने स्पीक मैके के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। अतिथियों का स्वागत किया।
आरंभ में राग तोड़ी की प्रस्तुति ने सबको संगीत रूपी समुद्र में गोते लगाने का अनोखा अवसर दिया। हर एक तान और हर एक स्वर ने श्रोताओं के हृदय को उद्वेलित किया और तालियों की गड़गड़ाहट लगातार प्रेक्षागृह में गूंजती रही।
राग की प्रस्तुति के बाद पंडित जी ने बहुप्रसिद्ध भजन “हे गोविंद राखु शरण” की प्रस्तुति दी, जिसने सबके मन को मोह लिया और सभी संगीत प्रेमी, स्वरों की कोमल धारा में साथ बहने लगे और इस संगीतमयी सफ़र में खो से गये।
प्रस्तुति के दौरान पंडित जी ने संगीत की कुछ महत्वपूर्ण बारीकियों के बारे में भी छात्र छात्राओं को बताया। साथ ही संगीत को साधने और उसको प्रस्तुत करने के रहस्य की भी संक्षिप्त व्याख्या की।प्रस्तुति के उपरांत प्रो. डॉली सिन्हा ने भी कार्यक्रम के संदर्भ में अपना वकतव्य दिया।
ततपश्चात साजन मिश्र ने भी अपने अनुभव और आशीर्वचन के रूप में अपनी बातें रखीं। प्रस्तुति के बाद सभी अतिथि कलाकारों को अंगवस्त्र, पाग एवं मिथिला पेंटिंग से सम्मानित किया गया। मंच संचालन की ज़िम्मेदारी ऋषभ एवं निखिल ने निभाई। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नित्यप्रिय प्रलय ने किया। मौके पर शहर के कई गणमान्य लोग एवं विभाग के सभी छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।





