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Darbhanga जिला परिषद सदस्यों पर दर्ज FIR और गत बैठक में चयनित योजनाओं के अग्रेतर कार्रवाई पर लगी High Court की रोक

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दरभंगा, देशज टाइम्स। जिला परिषद सदस्यों पर दर्ज किये गए मुकदमा एवं गत में बैठक में चयनित योजनाओं के अग्रेतर कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। शनिवार को जिला परिषद परिसर में सदस्य कक्ष में गत 11/09/23 के बैठक के पश्चात जिला परिषद दरभंगा में हुए घटनाक्रम के सन्दर्भ में सदस्यों की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी गई है।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित जिला परिषद सदस्यों की ओर से 18 सदस्यों पर 17 धाराओं में दर्ज किये गए मुकदमा, दो जिला परिषद सदस्यों की गिरफ्तारी, अवैध, पक्षपाती एवं मनमानी तरीके से किये गए योजना चयन, अनुमंडलाधिकारी की ओर से जिला परिषद के सदस्यों पर धारा 107 के तहत किये गए कार्रवाई, 5 लाख के बॉन्ड भरने के लिए लगातार दवाब डाले जाने, 24 सदस्यों के अनुपस्थिति में 27/09/23 को बैठक आयोजित कर पुनः मनमानी पूर्वक योजना का अवैध चयन समेत अन्यान्य विषयों पर विस्तृत जानकारी दिया गया।

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केवटी प्रखंड के जिला परिषद सदस्य धीरेंद्र मिश्रा ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा गत 11 सितंबर के बैठक में हमलोग नियमसंगत तरीके से बैठक का संचालन करने संबंधित आग्रह कर रहे थे। इसी संदर्भ में अपनी बात रख रहे थे।

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पंचायती राज अधिनियम 2006 में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि वार्षिक विकास कार्य योजना तैयार करने से पहले “जिला पंचायत विकास समिति” का गठन कर उसमें जिला परिषद का वार्षिक बजट तैयार किया जाए और उस बजट को सदन से पारित करवाने के पश्चात क्षेत्रवार योजना का चयन किया जाए।

परन्तु बार-बार आग्रह करने के बावजूद मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी की ओर से अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के दवाब में नियम को ताक पर रख योजनाओं को सदन के पटल पर स्वीकृति के लिए प्रस्तुत कर दिया गया। हमलोगों ने इसका विरोध किया तो हमलोगों पर 17 धाराओं में मुकदमा करवाया गया।

वहीं बहादुरपुर जिला परिषद सदस्य सीता देवी ने कहा कि सदन में योजना चयन हेतु जो सूची प्रस्तुत किया गया उसपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी या अध्यक्ष का कहीं कोई हस्ताक्षर दर्ज नहीं था। ऐसे में उस सूची का वैधानिक तौर पर कोई सरकारी महत्व नहीं हो सकता है।

सूची को देखने से ज्ञात हुआ कि उसमें भारी असमानता है और कुछ ऐसे भी सदस्य हैं जिनके क्षेत्र में एक भी योजना नहीं था। फलस्वरूप उन्होंने आक्रोशित होकर उक्त बिना हस्ताक्षर वाले कागजी सूची को फाड़ दिया, जो कि लोकतंत्र में विरोध का एक तरीका है। और इस प्रकार की घटनाएं कई बार संसद एवं विधानसभा में भी होती रही है परंतु इसके आधार पर कभी किसी पर कोई मुकदमा नहीं चलाया गया। जबकि यहां हमलोगों के उपर दर्ज किये गए मुकदमा में इसे भी आधार बनाया गया है।

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वहीं घनश्यामपुर प्रखंड से MSU के जिला परिषद सदस्य धीरज कुमार झा ने कहा कि 11 सितंबर को आयोजित बैठक में नियमसंगत बैठक संचालन की मांग कर रहे थे, लेकिन जब लगातार जब हमारी बातों को नजरअंदाज किया गया तो साथी जिला परिषद सदस्य की ओर से जमीन पर लेटकर लोकतांत्रिक विरोध दर्ज किया गया।

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लेकिन क्षेत्र के आवाज उठाने पर जिला परिषद के 18 सदस्यों पर जिस प्रकार FIR दर्ज किया गया और हमारे दो साथी सागर नवदिया एवं अमित कुमार ठाकुर को मुकदमा में फंसाकर गैरकानूनी तरीके से जिस प्रकार से जेल भेज दिया गया है, वो लोकतांत्रिक व्यवस्था, जिला परिषद, दरभंगा एवं पंचायती राज व्यवस्था पर काला धब्बा बनकर लगा है।

हमलोग गिरफ्तारी और मुकदमा से डरने वाले लोग नहीं हैं, हमलोगों के क्षेत्र की जनता ने हमे बड़ी आशा उम्मीद के साथ अपने क्षेत्र से निर्वाचित कर के भेजा है। और, अगर हमारे क्षेत्र के साथ हकमारी किया जाएगा तो उसके विरुद्ध हमलोग हर लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। हमें न्यायिक व्यवस्था पर पूर्ण विश्वास है और दोनों साथी शीघ्र रिहा होकर बाहर आएंगे तत्पश्चात हमलोगों के हक की लड़ाई पूर्ववत जारी रहेगी।

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वहीं जिला परिषद सदस्य धर्मेंद्र झा ने कहा कि जिला परिषद के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जिन्हें रक्षक के भक्षक बन चुके थे फलस्वरूप हमलोगों ने उच्च न्यायालय पटना में सीडब्लूजेसी पेटिशन फाइल किया।

हाईकोर्ट मे हमलोगो ने जिला परिषद दरभंगा में हमलोगों के साथ किये गए अत्याचार के विरुद्ध 5 याचिका दायर किया है। उक्त पांच में से दो मामलों पर हाईकोर्ट का तत्कालीन आदेश आ चुका है और उक्त दोनों आदेश में क्रमशः गलत तरीके से चयनित योजनाओं पर अग्रेतर कारवाई रोकने एवं जिन सदस्यों के ऊपर मुकदमा दर्ज किया गया है, उनके गिरफ्तारी एवं अन्य किसी गतिविधी पर तत्काल रोक लगाने का आदेश जारी गया है।

वहीं जिला परिषद के सामान्य स्थायी समिति के सदस्य हबीबुल्लाह हाशमी ने कहा कि कितनी खेद की बात है कि जिला परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी तीनों महिला है उसके बावजूद 9 महिला सदस्यों पर मुकदमा दर्ज किया गया, उन्हें मानसिक तौर पर प्रताड़ित करते हुए निरंतर उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की गई। सत्ता और शासन का इससे घिनौना स्वरूप नहीं हो सकता है।

मौके पर जिला परिषद सदस्य रिंकी कुमारी, सामाजिक कार्यकर्ता बबलू सहनी, संजय चौपाल, फूलबाबू लालदेव, दुर्गेश कुमार, शंकर कुमार समेत अन्य लोग मौजूद थे।

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