दरभंगा। बिहार में सरकार बदलते ही गरीबों पर कथित अत्याचारों का सिलसिला तेज हो गया है। एक ओर फुटपाथी दुकानदारों के ठिकानों पर बुलडोजर चल रहा है, तो दूसरी ओर बड़े प्रतिष्ठानों को सरकारी जमीन पर कब्जा करने की खुली छूट मिल रही है। आखिर क्यों हो रहा यह दोहरा बर्ताव और क्या है इसके पीछे की कहानी?
दरभंगा में सीपीआई (माले) ने सरकार पर गरीबों को उजाड़ने और अमीरों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। पार्टी के जिला सचिव बैद्यनाथ यादव ने एक बयान जारी कर कहा कि भाजपा-जदयू की सरकार बनते ही गरीबों पर ज़ुल्म ढाना शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि वर्षों से बसे गरीब लोगों को अतिक्रमण के नाम पर बेदखल किया जा रहा है, जबकि सरकार ने स्वयं यह घोषणा की थी कि सभी गरीबों को 3 डिसमिल जमीन दी जाएगी और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के किसी को उजाड़ा नहीं जाएगा।
‘अतिक्रमण’ की दोहरी नीति पर सवाल
श्री यादव ने इस कार्रवाई को निंदनीय बताते हुए कहा कि सड़क किनारे छोटे-मझोले व्यवसायी अपनी दुकानें चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे, लेकिन अब अतिक्रमण के नाम पर इन सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बुलडोज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ गरीबों के घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बुलडोजर की जद में हैं, वहीं दूसरी तरफ अमीर लोगों को सरकारी जमीन का उपयोग करने के लिए खुली छूट मिली हुई है। आज भी दर्जनों तालाबों और सड़क की जमीन पर कब्जा कर बड़े-बड़े प्रतिष्ठान चल रहे हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
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वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
श्री यादव ने जोर देकर कहा कि सड़क के चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण के नाम पर गरीबों को उजाड़ने से पहले उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन ऐसा किए बिना उन्हें जबरन हटाया जा रहा है। सीपीआई (माले) ने सरकार से मांग की है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के गरीबों को उजाड़ने पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही, छोटे और मझोले व्यवसायियों के लिए एक मार्केट कॉम्प्लेक्स बनाकर उन्हें वहां जगह आवंटित की जाए, तभी उन्हें सड़क किनारे से हटाया जाना चाहिए।
विधानसभा के समक्ष विशाल धरना
इस मुद्दे को लेकर फुटपाथ दुकानदार आगामी 3 दिसंबर को बिहार विधानसभा के समक्ष एक बड़ा धरना प्रदर्शन करेंगे। यह विरोध प्रदर्शन व्यवसायी महासंघ के बैनर तले आयोजित किया जाएगा। इस धरने में दरभंगा से भी सैकड़ों फुटपाथी दुकानदार शामिल होंगे, जो सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त करेंगे।



