
Ganga Mahotsav: मिथिला की ऐतिहासिक धरती पर गंगा महोत्सव का आयोजन किसी उत्सव से कम नहीं था। वैशाख मास की पावन बेला में आस्था का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां गंगा की महिमा का बखान करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
दरभंगा के घनश्यामपुर प्रखंड के जयदेवपट्टी पंचायत में 23 अप्रैल को डॉ. बचनेश्वर झा के संयोजन में भव्य गंगा महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मिथिला की पावन भूमि पर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का संचार हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन दरभंगा ग्रामीण के विधायक ईश्वर कुमार मंडल, जिला कला एवं संस्कृति अधिकारी चंदन कुमार, वानेश्वरी भगवती और नियाश समिति सचिव संजीव कुमार झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर और फीता काटकर किया।
Ganga Mahotsav का महत्व और संदेश
Ganga Mahotsav का मुख्य उद्देश्य गंगा के सामाजिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाना था। डॉ. बचनेश्वर झा ने अपने संबोधन में वैशाख मास में जलदान के विशेष महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वैशाख शुक्ल सप्तमी तिथि को ही मां गंगा भागीरथ के अथक प्रयासों से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, इसलिए इस दिन का विशेष पुण्य है।
उन्होंने आगे बताया कि इस मौके पर एक हजार लीटर गंगाजल का वितरण किया जाएगा, जो जलदान की प्राचीन परंपरा को जीवंत करता है, ताकि लोग इस पावन जल को अपने घरों तक ले जा सकें और पुण्य लाभ अर्जित कर सकें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। जिला कला एवं संस्कृति अधिकारी चंदन कुमार ने भी भारत में गंगा की अविरल जलधारा के सामाजिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता और संस्कृति का प्राण है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
सम्मान और सांस्कृतिक कार्यक्रम
इस अवसर पर, जिला कला एवं संस्कृति अधिकारी द्वारा समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाले एक दर्जन से अधिक लोगों को प्रशस्ति पत्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद भवानी झा ‘सोनू दरभंगिया’ के नेतृत्व में आकर्षक संकीर्तन कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह को भक्तिभाव से भर दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में दिलीप कुमार, रामसेवक ठाकुर, बंशीधर मिश्र, अरुण कुमार झा, दिव्यांशु मिश्रा, सुमन मिश्रा, आयुष चौहान सहित कई गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। यह Ganga Mahotsav न केवल एक आयोजन था, बल्कि यह गंगा नदी के प्रति हमारी गहरी श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक भी बना।





