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Darbhanga News: Global Public School में शोक की लहर, ‘दादा जी’ के नाम से मशहूर निदेशक शिव शंकर झा का निधन, शिक्षा जगत में अपूरणीय क्षति

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Global Public School: ज्ञान का एक सूरज आज अस्त हो गया, शिक्षा की दुनिया में एक ऐसा शून्य छोड़ गया जिसे भरना अब शायद ही मुमकिन हो। आशापुर स्थित ग्लोबल पब्लिक स्कूल के निदेशक और प्रसिद्ध समाजसेवी शिव शंकर झा का निधन हो गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

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Global Public School के ‘दादा जी’ का देहावसान

आशापुर स्थित Global Public School के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है। निदेशक शिव शंकर झा न केवल एक प्रशासक थे, बल्कि विद्यालय के बच्चों से लेकर शिक्षकों तक, सभी के लिए ‘दादा जी’ के समान थे। उनके निधन की खबर से विद्यालय परिवार सहित पूरा इलाका शोकाकुल है। वे गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी एक संत की तरह सादगी और उच्च विचारों का आदर्श उदाहरण थे। विद्यालय को उनके लंबे सरकारी प्रशासनिक अनुभव का भरपूर लाभ मिला। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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बाढ़ग्रस्त इलाके से पटना विश्वविद्यालय तक का सफर

उनका जीवन संघर्ष और सफलता की एक मिसाल था। उनका जन्म दरभंगा के बाढ़ग्रस्त इलाके कुशेश्वरस्थान के हरिनगर गांव में हुआ था। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी आरंभिक शिक्षा गांव में पूरी की और फिर आठ किलोमीटर दूर बंगरहट्टा उच्च विद्यालय से मैट्रिक की पढ़ाई की। वे हमेशा अपनी कक्षा में प्रथम आते थे, जिसके लिए उन्हें सरकारी छात्रवृत्ति भी मिली। इसके बाद उन्होंने सीएम कॉलेज, दरभंगा और फिर अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई के लिए पटना विश्वविद्यालय का रुख किया।

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LIC से लेकर समाज सेवा तक, हर क्षेत्र में छोड़ी छाप

शिक्षा पूरी करने के बाद शिव शंकर झा ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में 38 वर्षों तक एक लंबा और सफल कार्यकाल पूरा किया। इस दौरान वे लगभग 15 जिलों में प्रबंधक के पद पर रहे। वे न केवल एक सफल अधिकारी थे, बल्कि अपने क्षेत्र के युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत भी बने, जिनसे प्रेरित होकर कई अन्य लोगों ने सरकारी नौकरी की ओर रुख किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। गांव से शहर आने वाले लोगों के लिए उनका मुजफ्फरपुर स्थित आवास एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता था। उन्होंने अपने गांव के मंदिर निर्माण सहित सभी सामाजिक कार्यों में हमेशा उल्लेखनीय योगदान दिया। हाल ही में उन्होंने एक श्राद्ध स्थल का भी निर्माण करवाया था।

पिछले कुछ समय से वे अस्वस्थ चल रहे थे, जिसके कारण उन्होंने विद्यालय की बागडोर अपने सुपुत्र पिनाकी शंकर को सौंप दी थी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। ग्लोबल पब्लिक स्कूल के पिनाकी शंकर ने कहा कि यह विद्यालय परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक सक्रिय रहते हुए उन्होंने 38 साल भारतीय जीवन बीमा निगम और 10 साल ग्लोबल पब्लिक स्कूल को अपनी सेवाएं दीं।

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