



संजय कुमार राय, देशज टाइम्स अपराध ब्यूरो प्रमुख। कुछ लोंगों के गलत कारनामों ने देश दुनियां में बिहार का नाम बदनाम कर दिया।
बिहार की राजधानी से पटना से पकड़े गये संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद जीतने भी राज बाहर आ रहें हैं, उससे यह जरूर पता लगता हैं कि इन सभी के मंसूबे राष्ट्र विरोधी हैं। इस बात के पुख्ता सबूत पुलिस के पास हैं। अगर हम कुछ दशक पहले की बात करें तो 2010 में चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई ब्लास्ट के बाद जो आरोपी गिरफ्तार हुए थे उस गिरफ्तारी में बाढ़ के मो काफिल, मो. कातिल एवं मो गौहर का नाम शामिल है।
इस गिरफ्तारी ने इतना तो जरूर स्पष्ट कर दिया था कि इंडियन मुजाहिद्दीन का “बिहार मॉडल “देश भर में काम कर रहा हैं। वर्ष 2013 के अक्टूबर माह में गांधी मेदान के हुंकार रैली में पटना स्टेशन से लेकर गांधी मैदान तक हुये सात ब्लास्ट ने पटना वासियों का नींद हराम कर दिया था इस मामले में जो मास्टर माईंड था वह कहीं और का नहीं बल्कि समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र का मनियारपुर निवासी मो तहसीन उर्फ मोनू था।
वह इंडियन मुजाहिद्दीन के आई टी सेल का इंडिया हेड था !न्यायालय से फांसी की सजा ने और स्पष्ट कर दिया कि बिहार में आतंकवादियों के स्लीपर सेल कितने मजबूत हैं !उस वक्त 15दिनों के भीतर चार जिलों में बम विस्फोट हुये इस विस्फोट ने इतना तो स्पष्ट कर ही दिया कि बिहार के आधे से अधिक जिलों में आतंकवादियों के स्लीपर सेल कितने मजबूत हैं।
आठ जून को बांका के मदरसे में ,दस जून को अररिया में ,17जून को दरभंगा स्टेशन और 20जून को सीवान में हुये बम विस्फोट ने सिम्मी और पीएफआई के गठजोड़ को स्पष्ट कर दिया था। अब पटना के फुलवारी शरीफ में गया के रहने वाले मर्गुब अहमद दानिश उर्फ ताहिर की गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट तो कर ही दिया कि बिहार के स्लीपर सेल अंतराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादियों के सहयोग से फल फूल रहा हैं।
मो ताहिर 2006 से 2020 तक दुबई में काम करता था। लॉकडाउन में बिहार आया और फुलवारी शरीफ को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। फुलवारी शरीफ से जलालुद्दीन एवं मो अतहर की गिरफ्तारी और उसके पास से मिले 2047के लक्ष्य को तय कर इसलामिक राष्ट्र की कल्पना तथा गजवा ए हिंद का लक्ष्य एक खतरनाक संकेत हैं।
ऐसे-ऐसे कारनामो से ऐसा प्रतीत होता हैं वह दिन दूर नहीं जब बिहार राष्ट्र विरोधी गतिविधियों का केन्द्र रहेगा !बिहार की सीमा नेपाल तथा बंगला देश से मिलती हैं जो अंतराष्ट्रीय आतंकवाद का सेफ पेसेज़ माना जाता हैं यह रास्ता हथियार आपूर्ति के लिये भी सरल और सुगम हैं !
बिहार के आठ जिले जैसे पश्चिम चंपारण पूर्वी चंपारण शिवहर सीतामढ़ी मधुबनी सुपोल अररिया किशनगंज से करीब 729 किलोमीटर की खुली सीमा नेपाल से जुड़ती हैं। पाकिस्तान से कई आतंकी नेपाल के जरिये भारत घुस सकता हैं और कई पकड़े गये लोग पूर्व में इसका खुलासा कर चुके हैं।
20 जुलाई 06 को मुंबई एटीएस ने मुंबई के लोकल ट्रेन में हुये ब्लास्ट के मामले में मधुबनी से मो कमाल को गिरफ्तार किया था। दो जनवरी 08को यू पी में सीआरपीएफ केम्प पर हमला करने के आरोप में मधुबनी से ही सबाउद्दीन को गिरफ्तार किया था। 9फरवरी 2010में दिल्ली ब्लास्ट में आरोपित मदनी को मधुबनी से गिरफ्तार किया गया था।
26 नवंबर 2011को मधुबनी से ही आतंकी कनेक्शन में दिल्ली पुलिस ने अफजल एवं गुल अहमद जमाली को गिरफ्तार किया था। 19नवंबर 11को दरभंगा जिला के केवटी थानाक्षेत्र के रहने वाले कातिल सिद्दिक्की उर्फ साजन की गिरफ्तारी दिल्ली से हुई थी। 12जनवरी 12 को दरभंगा से नदीम और नक्की की गिरफ्तारी हुई थी यही नहीं एक बाईक भी बरामद हुई थी जिसका इस्तेमाल विस्फोटक ढोने में किया जाता था।
21 फरवरी 12 को शिवधारा से साईकिल मिस्त्री कफील अहमद की गिरफ्तारी हुई थी उसे आईएम का मेंटर बताया गया। 06 जनवरी को 12 को चिन्ना स्टेडियम में हुये विस्फोट के मामले में बिहार से ही कफील अहमद की गिरफ्तारी हुई थी।
13 मई 12 को आईएम चीफ रियाज़ भटकल और इकबाल भटकल से जुड़े शातिर फसीह की गिरफ्तारी बिहार से हुई !21जनवरी 13को आतंकी हमले के आरोपी एवं यासीन भटकल के सहयोगी मो. दानिश अंसारी की गिरफ्तारी लहेरियासराय से हुई थी। वहीं अगस्त 13 में यासीन भटकल एवं अब्दुल असगर की गिरफ्तारी पूर्वी चंपारण से लगी नेपाल सीमा पर हुई वही अगस्त 2019 में बंगला देश के आतंकी संगठन जमात -उल -मुजाहिद्दीन के एक सदस्य को गया से कलकता एटीएस ने पकड़ा था।
ये सभी खुलासे पूर्व में पुलिस कर चुकी हैं। अब बिहार की पुलिस को ऐसे आतंकी संगठन के पर्दाफाश करने के लिये शख्त मेहनत करने की जरूरत हैं ताकि बिहार की बदनामी को रोका जा सके।






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