
दरभंगा में खौफनाक कांड! पति ने गर्भवती पत्नी को लोहे की रॉड से पीट-पीटकर मार डाला। पति का हैवानियत भरा चेहरा! एक साल की शादी का खूनी अंत – गर्भवती पत्नी की पति ने कर दी दर्दनाक हत्या। मामूली विवाद में पति बना हैवान।@दरभंगा,देशज टाइम्स
दरभंगा में गृहकलह- दहेज या कुछ और, गर्भवती पत्नी की पति ने लोहे की रॉड से की हत्या, एक साल पहले हुई थी शादी
दरभंगा, देशज टाइम्स। जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां सदर थाना क्षेत्र के रानीपुर गांव में पति ने अपनी गर्भवती पत्नी की बेरहमी से लोहे की रॉड से वार कर हत्या कर दी। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है।
विवाह के एक साल बाद टूटा रिश्ता, हुआ खूनी अंत
मिली जानकारी के अनुसार, मृतका विभा कुमारी (19 वर्ष) की शादी लगभग एक साल पहले शिव पासवान के पुत्र प्रमोद कुमार पासवान से हुई थी। विवाह के बाद से ही दंपति के बीच लगातार विवाद की स्थिति बनी रहती थी।
बुधवार की रात किसी मामूली बात पर हुए झगड़े ने ऐसा विकराल रूप लिया कि पति ने लोहे की रॉड (खंती) से विभा के सिर पर जोरदार हमला कर दिया।
गंभीर चोट के बाद पीएमसीएच में तोड़ा दम
हमले के बाद गंभीर रूप से घायल विभा को पहले डीएमसीएच (Darbhanga Medical College & Hospital) ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति देखते हुए पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) रेफर कर दिया।
दुर्भाग्य से, शुक्रवार की रात इलाज के दौरान विभा ने दम तोड़ दिया। परिवार की ओर से बताया गया कि विभा उस समय गर्भवती भी थी, जिससे यह वारदात और भी हृदयविदारक बन गई।
पुलिस की कार्रवाई, पिता का बयान दर्ज
सदर थाना पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। मृतका के पिता का फर्द बयान दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस ने कहा कि बयान और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना बिहार में गृह कलह और दहेज विवाद से जुड़ी उन घटनाओं की ओर इशारा करती है जो आज भी समाज के लिए गंभीर चुनौती हैं।
दरभंगा में बढ़ती घरेलू हिंसा की घटनाएं
दरभंगा जिला, जो अपनी संस्कृति और परंपरा के लिए जाना जाता है, अब लगातार घरेलू विवादों और अपराधों की घटनाओं से भी सुर्खियों में है। इस तरह की घटनाएँ समाज को झकझोरने वाली हैं और यह सवाल खड़ा करती हैं कि आखिर कब तक महिलाएँ हिंसा और उत्पीड़न का शिकार होती रहेंगी।
दरभंगा के रानीपुर गांव में हत्याकांड, क्या कहता है
दरभंगा के रानीपुर गांव में हुआ यह गृहकलह का हत्याकांड समाज को सोचने पर मजबूर करता है। गर्भवती पत्नी की हत्या जैसी घटनाएँ यह साबित करती हैं कि कानून सख्त होने के बावजूद सामाजिक सुधार की दिशा में अब भी बहुत काम बाकी है। इस घटना को रोक पाना संभव था यदि समय रहते परिवार और समाज ने हस्तक्षेप किया होता। यह घटना उन सभी के लिए चेतावनी है जो पारिवारिक विवादों को हल्के में लेते हैं।