

कुशेश्वरस्थान, देशज टाइम्स। कुशेश्वस्थान (Kusheshwarasthan) में सोमवार की दोपहर भीषण आग ने किसानों की पचास एकड़ में लगी मकई की खेती को राख में बदल दिया है।
जानकारी के अनुसार, आग बिषहरिया पंचायत के लरैल चौर में लगी है, जहां सोमवार की दोपहर मकई की खेत में अचानक लगी भीषण आग में पचास एकड़ से अधिक की मकई की खेतों जलकर राख हो गई है।
वहीं, मौके पर मौजूद किसानों ने रोते हुए बताया कि आग से मकई के पलारी (ठठेर) समेत मकई के बाइल (भूट्टा) जल कर राख हो गए हैं। मौके पर पहुंचे फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
किसानों ने देशज टाइम्स को बताया कि इस चौर में सौ एकड़ से अधिक की खेती मकई की किसानों ने की थी। एक तो मौसम अनुकूल होने से किसानों ने अपने खेतों में लगे मक्का की फसल को तैयार कर सुरक्षित घर ले गए।
वहीं, दस से बीस एकड़ जमीन में मक्का लगा हुआ था, तो कुछ खेतों में मक्का के शीश पसरा हुआ था। दोपहर करीब 11 बजे के आस पास अचानक एक खेत में आग लगी।
और देखते ही देखते करीब पचास एकड़ से अधिक खेतों में लगे मक्का के ठठेर सहित खेत में पड़े तैयार मक्का की बाली और पककर तैयार मक्का की फसल जलकर खाक हो गया।
इस घटना में बलांठ के जग नारायण मुखिया, सविता देवी, सीता देवी, मीना देवी, निराला देवी,हरमुखी देवी,ओझली देवी,रुणा देवी, सहित अनेक किसानों के मक्का के तैयार फसल, इसके डंठल तथा इसके बाली जलकर भस्म हो गया है।
सूचना मिलते ही दो फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंच कर आग बुझाने में जुट गए। लेकिन गाड़ी में पानी कम रहने से दुबारा पानी भरकर लाए और आग बुझाने में कामयाब हुए।
आग लगने की सही जानकारी नहीं है। लेकिन लोगों में ऐसी चर्चा है कि कोई किसान अपने खेत के मक्का की डंठल साफ करने के नियत से अपने खेत में आग लगाया। जिससे इतना बड़ा नुक्सान हुआ।
जानकारी के अनुसार, खेतों में फसल के पराली जलाना कानूनन अपराध है। ऐसे करने वालों पर जुर्माना और सजा का भी प्रावधान है। प्रखंड क्षेत्र में पराली जलाने की यह पहली घटना है।


