



Farmer Registry ID: किसानों के सम्मान से जुड़ी योजना की गाड़ी प्रशासनिक सुस्ती के गड्ढों में हिचकोले खा रही है। दरभंगा के जाले प्रखंड में स्थिति यह है कि आधे से भी कम किसानों का पंजीकरण हो पाया है, जिससे सरकार से मिलने वाली सम्मान निधि की राह और भी लंबी और कठिन हो गई है।
प्रखंड में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के कुल 15,481 लाभार्थी हैं, लेकिन कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार गुरुवार तक सिर्फ 5,905 किसानों की ही फार्मर रजिस्ट्री आईडी बनाई जा सकी है। हालांकि, इनमें से 13,675 लाभार्थी अपना ई-केवाईसी पूरा करा चुके हैं, जो यह दिखाता है कि समस्या प्रक्रिया के अगले चरण में है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
क्या है Farmer Registry ID बनाने में देरी का कारण?
इस धीमी रफ्तार के पीछे मुख्य वजह जमीन से जुड़े दस्तावेजों का अपडेट न होना है। प्रखंड कृषि पदाधिकारी (बीएओ) प्रेम नाथ सिंह ने बताया कि भूमि अभिलेखों के विवरण में कमी के कारण आईडी बनाने में विलंब हो रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर लगाए जा रहे शिविरों में किसानों की उपस्थिति भी संतोषजनक नहीं है।
इस चुनौती से निपटने के लिए अब विभागीय कर्मियों ने घर-घर जाकर आईडी बनाने का अभियान शुरू कर दिया है। विभाग का लक्ष्य इस काम में तेजी लाना है, ताकि कोई भी पात्र किसान पीएम किसान योजना के लाभ से वंचित न रह जाए।
बीएओ ने स्पष्ट किया, "सभी किसानों का Farmer Registry ID बनाना अनिवार्य है। फिलहाल हम पीएम किसान योजना के लाभुकों को प्राथमिकता दे रहे हैं।"
अधिकारियों ने दी चेतावनी, पंचायत सचिवों को मिली नई जिम्मेदारी
अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपने आवश्यक दस्तावेजों के साथ पंचायत शिविरों में पहुंचें और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कराएं, ताकि सम्मान निधि की राशि उनके खाते में बिना किसी रुकावट के आती रहे। कृषि समन्वयक और किसान सलाहकार ई-केवाईसी की प्रक्रिया में मदद कर रहे हैं, जबकि भूमि सत्यापन का जिम्मा अंचल कार्यालय के राजस्व कर्मियों पर है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
वहीं, इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब राजस्व कर्मियों के हड़ताल पर जाने की वजह से काम प्रभावित हुआ। इस पर अंचलाधिकारी (सीओ) वत्सांक ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर अब राजस्व कार्य का प्रभार पंचायत सचिवों को सौंप दिया गया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। उम्मीद है कि पंचायत सचिवों के जुड़ने से इस महत्वपूर्ण कार्य में तेजी आएगी।

