
Wheat Harvesting: जाले प्रखंड में इन दिनों किसानों की परेशानी सातवें आसमान पर है। मौसम के बदलते मिजाज के बीच गेहूं की कटाई ने रफ्तार तो पकड़ी है, लेकिन बेमौसम बारिश ने फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है, जिससे भूसा संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।जाले के खेतों में गेहूं की कटाई जहां रीपर-कम-बाइंडर और मजदूरों के सहारे तेजी से की जा रही है, वहीं कई स्थानों पर कटाई का काम लगभग पूरा भी हो चुका है। हालांकि, बेमौसम बारिश के कारण खेतों में गिरी Wheat Harvesting किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। गिरे हुए पौधों की कटाई में अधिक समय और मेहनत लगने के कारण न तो रीपर-कम-बाइंडर संचालक इसे काटने को तैयार हैं और न ही मजदूर इसमें रुचि दिखा रहे हैं। ऐसे में किसान मजबूरी में कंबाइन हार्वेस्टर की तलाश में भटक रहे हैं।
बारिश से प्रभावित गेहूं की फसल और कटाई की चुनौतियां
बारिश के कारण गिरी फसल को उठाने में रीपर और मजदूरों की अनिच्छा के चलते किसानों को कंबाइन हार्वेस्टर ही एकमात्र सहारा दिख रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस बीच, कटाई के साथ ही पशुओं के चारे यानी भूसा की मांग में भी तेजी आ गई है। पशुपालक भूसा के लिए खेत-खेत भटक रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लग रही है।
पशुपालकों के लिए गहराता भूसा संकट
पशुपालकों का कहना है कि फरवरी-मार्च में हुई बारिश से अधिकांश गेहूं की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। समय से पहले फसल गिरने के कारण दाना हल्का हो गया और पौधे भी खराब हो गए हैं। इसके चलते क्षेत्र में भूसा संकट की स्थिति बनती दिख रही है, जिससे किसानों और पशुपालकों की चिंता और भी बढ़ गई है। आने वाले दिनों में यह भूसा संकट और गहरा सकता है, जिसका सीधा असर पशुपालन पर पड़ेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।







