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फ़रवरी, 16, 2026
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ठंड के मौसम में आलू फसल पर झुलसा रोग के कहर से कैसे बचें, दे रहे जाले कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. रामप्रवेश प्रसाद टिप्स, पढ़िए पूरी खबर

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जाले कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक डॉ. रामप्रवेश प्रसाद ने ठंड के मौसम में झुलसा रोग से बचाव को किसानों को लेकर किसानों को टिप्स दिए। उन्होंने बताया, आलू का पछेती झुलसा एक फफॅूद जनित महामारी रोग है।
यह रोग 15 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान आपेक्षिक आद्रता (100%) पर बहुत तेजी से फैलता है और 2 से 3 दिन के अंदर पूरी फसल नष्ट हो जाती है। झुलसा रोग आलू में उपयुक्त वातावरण मिलने पर कभी प्रगट हो सकता है।
सर्वप्रथम यह रोग पौधे की सबसे निचली पत्ती पर गोला कार्य अनियमित आकार के जलसिकत, हल्के पीले धुधले धब्बे के रूप में प्रकट होता है अनुकूल मौसम मिलने पर शीघरता से पूरे पत्ती पर फैल जाता है जिसके कारण पत्तियां भूरे का लेया बैगनी काले रंग में बदल जाती है यदि मौसम लगातार नम रहता है और हल्की बूंदा बादी  हो जाती है।
ऐसी स्थिति में पौधे के सभी कोमल 2 से 4 दिन में  मर जाते हैं तथा उनसे विशेष प्रकार की दुर्गंध भी आने लगती है, परंतु अगर मौसम शुष्क  हो तो पत्तियों पर कत्थई रंग के धब्बे खड़े होकर सिकुड़ जाते हैं !इस रोग का प्रकोप भूमि मे दबे आलू  पर भी होता है जिसके कारण कंदो  पर भी बिग्लन उत्पन्न हो जाता है!
इस प्रकार इस रोग से बचाव हेतु किसान भाई निम्नलिखित उपाय करें – 1.खेत में या खेत के आसपास कोई खरपतवार जैसे मकोय ,धतूरा जंगली रसभरी इत्यादि को खेत में नहीं होने देना चाहिए !
2.जो किसान भाई आलू में भी मिट्ठी नहीं चढ़ा है यथाशीघ्र आलू के  पर 10 से 15 सेंटीमीटर मिट्टी चढ़ा दे !जिससे कि कंदो  में संक्रमण की संभावना कम हो जाए !
3.आलू के फसल का  नियमित निगरानी रखें !
4.आलू की फसल पर झुलसा का प्रकोप से बचाव हेतु मैनकोज़ेब नामक दवा का ढाई ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर एक रक्षात्मक छिड़काव करें !
5.यूरिया व फसल में सिंचाईआवश्यकतानुसार ही करें !
6.पहले छिड़काव के 1 सप्ताह बाद रिडोमिल या क्लोरोथालूनील दवा का 1.5  ग्राम प्रति लीटर पानी मिलाकर करें .
7, जब फसल पर रोग लग गया हो ऐसी अवस्था में सिंचाई बिल्कुल ना करें अन्यथा यह रोग और तेजी से फैल जाता है ।
दवा का छिड़काव करते समय ध्यान रखें कि दवा फसल की प्रत्येक भाग पर अच्छी तरह से पड़े।
रोगग्रसित फसलों के अवशेष को पशु को न खिलाएं और नहीं खेत में ही छोड़ दें फसल अवशेष को इकट्ठा कर वर्मी कंपोस्ट बनाने मे  प्रयोग करें।इस प्रकार किसान भाई आलू में लगने वाली झुलसा रोग से अपनी फसल को बचा सकते हैं।

 

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