

जाले प्रखंड क्षेत्र में यक्ष्मा यानी टीबी रोग का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2021 में प्रखंड क्षेत्र में इस संक्रमण से लोग संक्रमित हो रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग यक्ष्मा रोग के रोकथाम के लिए यक्ष्मा पीड़ितों को मुफ्त जांच चिकित्सा वह दवा उपलब्ध करवा रही है, फिर भी दिनों-दिन इस रोग की रोकथाम की बजाए इसमें बढ़ोतरी देखी जा रही है।
वर्ष 2020 के मुकाबले 2021 में 35 पीड़ित बढ़े
अगर इसी रफ्तार से यह रोग बढ़ने से स्वाथ्य विभाग में चिंता दिख रहा है। टीबी संक्रमण के बढ़ते मामले के विषय में पूछे जाने पर एक यक्ष्मा कर्मी ने बयाया को कोविड 19 के के कारण यक्ष्मा रोग नियंत्रण के जांच के लिए विभाग में सभी लैब टेक्नीशियन को कोरोना जांच टीम में लगाए जाने से दो माह टीबी रोगियों की जांच रुकने से यक्ष्मा रोगियों इजाफा हुई।
यक्ष्मा रोग पर्यवेक्षण पदाधिकारी वसीउर रहमान ने जानकारी दिया कि वर्ष 2000 में जहां 106 यक्ष्मा के संक्रमित मरीज मिले थे। सभी 106 रोगीयों की चिकित्सा रेफरल अस्पताल जाले से की गई।
वही बीते 2021 में कोबीड 19 के बढ़ते संक्रमण के कारण दो माह मई एवम जून 2021 में यक्ष्मा रोगियों की जांच भी थक गई,इसके लैब टेक्नीशियन को कोबिड 19 जांच में लगाया गया। इससे यक्ष्मा रोगियों से अन्य को संक्रमण बढ़ता गया। वर्ष 2021 में 141 यक्ष्मा रोगी चिन्हित किए गए, जिसकी चिकित्सा अस्पताल जाले रेफर हॉस्पिटल के यक्ष्मा यूनिट से की जा रही है।
बीते वित्तीय वर्ष 2021में जनवरी माह में जहां 7 लोग यक्ष्मा रोग से पीड़ित पाए गए वहीं फरवरी में 14 मार्च में 15 अप्रैल में 16 मई में दो जून में 6 जुलाई में 10 अगस्त में 14 सितंबर में 15 अक्टूबर में 20 नवंबर में 14 और दिसंबर में 11 टीबी यक्ष्मा रोगी मिले।
मल्टीड्रग रेजिटेंट रोगी की संख्या 14 है, जिनका इलाज लगातार 18 से माह तक वह 20 माह तक किया जाता है। यह बहुत जटिल टेब्रोक्लोसिस रोगी होते है। इस रोगियों से अत्यधिक संक्रमित करता है,कुल मिलाकर यक्ष्मा से बचाव के लिए लोगों को बचाव का खुद उपाय करना ही बेहतर तरीका है।
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