
Rural Employment Guarantee Act: जैसे चुनावी बिसात पर वादों के सिक्के उछाले जाते हैं, केंद्र सरकार ने ग्रामीण भारत के लिए एक ऐसा पासा फेंका है जो खेल बदल सकता है। यह महज़ एक कानून नहीं, बल्कि गांवों की तक़दीर बदलने का एक महत्वाकांक्षी खाका है। दरभंगा में बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और जाले विधायक जीवेश कुमार ने केंद्र सरकार के इस नए अधिनियम के प्रावधानों को विस्तार से समझाया, जिसका लक्ष्य ग्रामीण भारत की तस्वीर को बदलना है।
दरभंगा परिसदन में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने “विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025” को ग्रामीण रोजगार नीति में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के माध्यम से अब गांवों में परिवारों को 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के कानूनी मजदूरी रोजगार की गारंटी मिलेगी, जिससे गरीब और वंचित परिवारों की आय सुरक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण सुनिश्चित होगा।
क्या हैं नए Rural Employment Guarantee Act के प्रमुख प्रावधान
पूर्व मंत्री जीवेश कुमार ने बताया कि यह अधिनियम केवल रोजगार देने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य गांवों में टिकाऊ और उत्पादक संपत्तियों का निर्माण करना भी है। उन्होंने इसके प्रमुख लाभों को रेखांकित किया:
- बढ़ी हुई रोजगार गारंटी: अब प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 100 के स्थान पर 125 दिनों का सुनिश्चित रोजगार मिलेगा।
- टिकाऊ संपत्ति निर्माण: जल संरक्षण, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और आजीविका से जुड़ी संरचनाओं के निर्माण पर जोर दिया जाएगा, ताकि रोजगार के साथ-साथ दीर्घकालिक ग्रामीण विकास भी हो सके।
- पंचायतों की बढ़ी शक्ति: योजना निर्माण की शक्ति ग्राम सभा और पंचायतों को दी गई है, जिससे योजनाएं धरातल की जरूरतों के अनुसार (Bottom-Up Approach) बनेंगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- डिजिटल इंटीग्रेशन: योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म और पीएम गति शक्ति जैसे ढांचों से जोड़ा जाएगा, ताकि संसाधनों का बेहतर समन्वय हो और किसी भी तरह के दुरुपयोग पर रोक लग सके।
उन्होंने इस अधिनियम को विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय विजन की दिशा में एक ठोस और निर्णायक कदम बताया।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर सरकार का जोर
जीवेश कुमार ने इस बात पर विशेष बल दिया कि नए कानून में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक सत्यापन, जियो-टैगिंग और रियल-टाइम डैशबोर्ड जैसी तकनीक के इस्तेमाल से भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। योजनाओं का अनिवार्य सोशल ऑडिट भी किया जाएगा।
मजदूरों के अधिकारों को लेकर उन्होंने कहा कि अब मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक और समयबद्ध तरीके से किया जाएगा। यदि भुगतान में कोई देरी होती है, तो मुआवजे का भी स्पष्ट प्रावधान है, जिससे मजदूरों को उनका हक समय पर मिलेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह अधिनियम मजदूरों के अधिकारों को कमजोर नहीं, बल्कि और अधिक मजबूत कानूनी संरक्षण देता है। बेरोजगारी भत्ता और एक सशक्त शिकायत निवारण प्रणाली भी इसका हिस्सा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
अंत में, उन्होंने विश्वास जताया कि यह मिशन बिहार सहित पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास को नई गति देगा। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवटी विधायक डॉ. मुरारी मोहन झा, हायाघाट विधायक डॉ. रामचंद्र प्रसाद, भाजपा जिलाध्यक्ष आदित्य नारायण मन्ना और एनडीए गठबंधन के कई अन्य नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद थे।




