



Nilgai आतंक: मानो खेतों पर आसमानी नहीं, बल्कि नीले रंग का कहर टूट पड़ा हो। दिन-रात की मेहनत पर जब नीलगायों का झुंड गुजरता है, तो पीछे सिर्फ बर्बादी और किसान के आंसू रह जाते हैं। कमतौल अहियारी नगर पंचायत से लेकर जाले प्रखंड क्षेत्र तक के कई गांवों में किसान इन दिनों नीलगायों के आतंक से त्रस्त हैं। आलम यह है कि अपनी ही फसल की रक्षा करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि कई किसान अब खेती से मुंह मोड़ने का मन बना रहे हैं। पिछले कुछ सालों में नीलगायों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, जिसके कारण किसानों ने मक्का और सब्जी जैसी फसलें लगाना लगभग बंद कर दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Nilgai आतंक: खेतों में झुंड के झुंड बनकर करते हैं फसल बर्बाद
अहियारी के स्थानीय किसान उमेश ठाकुर, दिलीप ठाकुर, छेदी पासवान और दुखी दास जैसे कई लोग अपनी व्यथा बताते हुए कहते हैं कि नीलगायों के कारण खेती अब मुनाफे का नहीं, बल्कि घाटे का सौदा बन गई है। वे बताते हैं कि एक साथ दर्जन भर से ज्यादा नीलगायों का झुंड खेतों में घुस आता है। ये जानवर जिस भी खेत में जाते हैं, वहां की फसल को चरने के साथ-साथ अपने पैरों से रौंदकर पूरी तरह बर्बाद कर देते हैं। इससे किसानों को दोहरा फसल का नुकसान होता है। किसानों ने बताया कि उन्होंने कई बार इन झुंडों को खदेड़ने की कोशिश की, लेकिन वे अगले ही दिन फिर लौट आते हैं।
प्रशासन की चुप्पी और कानून का डर, किसान आखिर जाएं तो जाएं कहां?
किसानों की मानें तो नीलगायों का आतंक दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। गांवों के बाहरी इलाकों में दर्जनों नीलगायों को खुलेआम फसल बर्बाद करते देखा जा सकता है। कृषि के लिए इतने घातक साबित हो रहे इन जानवरों से मुक्ति दिलाने के लिए न तो जिला प्रशासन कोई ठोस पहल कर रहा है और न ही वन विभाग इस मामले में कोई दिलचस्पी दिखा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ऐसी बेबसी में किसान केवल भगवान भरोसे खेती करने को मजबूर हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। एक और बड़ी समस्या यह है कि नीलगाय एक जंगली जीव है, और वन्य प्राणी अधिनियम के तहत इसे मारना या नुकसान पहुंचाना कानूनन अपराध है। इसी कानूनी कार्रवाई के डर से ग्रामीण इन पर हमला करने से भी कतराते हैं। किसानों का कहना है कि 24 घंटे खेतों की रखवाली करना संभव नहीं है। उन्होंने प्रशासन से किसान हित में ठोस कदम उठाने और इन नीलगायों के आतंक से मुक्ति के लिए जल्द से जल्द एक अभियान चलाने की मांग की है।



