



Darbhanga School Wall Collapse: कमतौल दरभंगा देशज टाइम्स।खिलौनों से भरी बचपन की दुनिया, मासूम हंसी और उम्मीदों से लबरेज आंखें… लेकिन एक ढहती दीवार ने सब कुछ पल भर में मलबे में बदल दिया। बिहार के कमतौल में एक स्कूल की दीवार गिरने से एक नन्हीं जान ने अपनी आखिरी सांसें लीं, जिसने लापरवाही और घटिया निर्माण पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
Darbhanga School Wall Collapse: कमतौल में स्कूल की जर्जर दीवार बनी मासूम की कब्र, 5 साल के बच्चे की मौत से पसरा मातम
Darbhanga School Wall Collapse: आखिर कब थमेगी लापरवाही की यह दीवार?
कमतौल। बिहार के कमतौल थाना क्षेत्र के करवा तरियानी पंचायत स्थित रजौन गांव में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मध्य विद्यालय की उत्तरी दीवार अचानक ढह गई, जिसकी चपेट में आकर बाहर खेल रहा पांच वर्षीय मासूम ऋषि झा गंभीर रूप से घायल हो गया। ऋषि झा, दीपक झा के इकलौते पुत्र थे और दो बहनों के सबसे छोटे भाई थे। यह घटना शनिवार दोपहर करीब ढाई बजे घटी, जिसने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया।

घटना की सूचना मिलते ही ऋषि के परिजन और स्थानीय ग्रामीण आनन-फानन में घटनास्थल पर पहुंचे। मलबे के ढेर में दबे मासूम को बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे शहर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। परिजन तुरंत ऋषि को मुजफ्फरपुर स्थित एक निजी अस्पताल ले गए, लेकिन दुर्भाग्यवश, रविवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पूरे गांव में शोक का माहौल छा गया और परिजनों ने गमगीन माहौल में बालक का अंतिम संस्कार कर दिया।
ग्रामीणों ने इस दुखद घटना के लिए विद्यालय की चारदीवारी के घटिया निर्माण को जिम्मेदार ठहराया है। राजदेव यादव, सुशील शाह, शंकर साह, सेवक यादव, उमेश साह, प्रमोद साह, मोहन साह और विनय यादव सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि बच्चे स्कूल के बाहर खेल रहे थे जब अचानक दीवार गिर गई और ऋषि उसकी चपेट में आ गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस एजेंसी ने इस दीवार का निर्माण किया था, उसने गुणवत्ता से खिलवाड़ किया। ग्रामीणों के अनुसार, दीवार में दिए गए पिलर केवल दिखावे के थे। पिलरों के अंदर केवल छड़ बांधकर छोड़ दिया गया था और उनमें बालू-गिट्टी भरने की बजाय ऊपर से प्लास्टर कर दिया गया था। इसी कारण दीवार में कोई मजबूती नहीं थी, और यह दर्दनाक हादसा हो गया। यह घटना **सरकारी निर्माण की गुणवत्ता** पर गंभीर सवाल उठाती है, जहां छोटी-छोटी लापरवाहियां मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ रही हैं।
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घटिया निर्माण की भेंट चढ़ा बचपन
इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठाई हैं। जर्जर हो चुकी या घटिया ढंग से निर्मित दीवारों की निगरानी क्यों नहीं की गई, यह एक बड़ा प्रश्न है। यदि समय रहते इन कमियों पर ध्यान दिया गया होता, तो शायद ऋषि की जान बचाई जा सकती थी। इस तरह के हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए यह आवश्यक है कि सभी सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन किया जाए और नियमित रूप से उनकी जांच की जाए। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई और मासूम इस तरह की **सरकारी निर्माण की गुणवत्ता** की भेंट न चढ़े। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक दीवार नहीं गिरी है, बल्कि भरोसे और उम्मीदों की बुनियाद गिरी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह घटना याद दिलाती है कि हमारे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी हम सभी की है, खासकर उन लोगों की जो सार्वजनिक ढांचों के निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार हैं।




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