

Student Hostel Bihar: शिक्षा के मंदिर में जब बच्चों के लिए छत का सहारा ही न मिले, तो भविष्य की नींव कैसे रखी जाएगी? कुँवर सिंह महाविद्यालय के सैकड़ों छात्रों के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है, जहाँ सालों से बंद पड़ा छात्रावास उनके सपनों पर ताला लगाने जैसा बन गया है। कुँवर सिंह महाविद्यालय का छात्रावास लंबे समय से बंद रहना छात्रों के अधिकारों के साथ सीधा अन्याय है, जिससे दूर-दराज़ से आने वाले छात्र गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं।
दूर-दराज़ के इलाकों से आकर शिक्षा ग्रहण करने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राएं इस बंदी के कारण गंभीर आर्थिक, मानसिक और शैक्षणिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों को महंगे किराए के कमरों में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई-लिखाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह स्थिति प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है।
Student Hostel Bihar: क्यों बंद है कुँवर सिंह कॉलेज का छात्रावास?
छात्रों द्वारा बार-बार छात्रावास खोलने की मांग उठाने के बावजूद, महाविद्यालय या विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट तिथि या ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। यह उदासीनता प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाती है और छात्रों में भारी आक्रोश है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
इस गंभीर मुद्दे पर मिथिला स्टूडेंट यूनियन (MSU) के विश्वविद्यालय अध्यक्ष अनिश चौधरी ने अपने आंदोलनात्मक तेवर स्पष्ट करते हुए कहा, “कुँवर सिंह महाविद्यालय का छात्रावास बंद रहना छात्रों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ है। छात्रावास कोई सुविधा नहीं, बल्कि मूलभूत आवश्यकता है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन अविलंब छात्रावास नहीं खोलता और एक स्पष्ट तिथि घोषित नहीं करता है, तो मिथिला स्टूडेंट यूनियन चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने साफ कहा कि सड़क से लेकर विश्वविद्यालय मुख्यालय तक संघर्ष किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
इसी क्रम में शुभम ठाकुर ने भी संगठन की ओर से कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि “हम छात्रों के अधिकार के लिए हर हाल में लड़ेंगे और किसी भी कीमत पर छात्रों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय प्रशासन से तत्काल छात्रावास खोलने या इसकी निश्चित तिथि सार्वजनिक करने की मांग की, अन्यथा आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। यह छात्रों के अधिकार का सीधा मामला है, और प्रशासन को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ क्यों?
छात्रावास की बंदी न केवल छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है, बल्कि उनकी पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। कई छात्र पैसों की कमी के कारण अच्छी शिक्षा से वंचित हो रहे हैं, जो उनके भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह देखना होगा कि प्रशासन कब तक छात्रों की इस जायज़ मांग पर कान देता है और कब छात्रावास के ताले खुलते हैं।

