कुशेश्वरस्थान रेल न्यूज: सकरी-हसनपुर रेल परियोजना को उसके पूर्व निर्धारित मार्ग से शीघ्र पूरा करने और कुशेश्वरस्थान को रेल सुविधा से जोड़ने की मांग को लेकर मंगल को पूरे कुशेश्वरस्थान बाजार में व्यापक बंद देखा गया। सुबह से ही दुकानें बंद रहीं और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ। स्थानीय जनता, व्यवसायी, सामाजिक संगठन और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने इस बंद का समर्थन करते हुए आंदोलनकारियों के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित की, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
रेल परियोजना को लेकर फूटा जन आक्रोश
बाजार बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, सांसद शांभवी चौधरी और विधायक अतिरेक कुमार के विरुद्ध ‘हाय-हाय’ और ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाए गए, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों का गुस्सा साफ दिखाई दिया। आंदोलनकारियों का आरोप है कि क्षेत्र की वर्षों पुरानी इस रेल परियोजना को जानबूझकर उपेक्षित किया जा रहा है, जिससे लाखों लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर रहा है और यह महत्वपूर्ण बिहार रेल प्रोजेक्ट अधर में लटक गया है।
बंद के दौरान आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए मुख्य पार्षद शत्रुघ्न पासवान ने बताया कि कुशेश्वरस्थान में रेल सेवा पहुंचाना पूर्व केंद्रीय मंत्री और कद्दावर नेता रामविलास पासवान का एक बड़ा सपना था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कुशेश्वरस्थान उनका ननिहाल भी है, जिससे इस परियोजना का व्यक्तिगत और भावनात्मक महत्व और बढ़ जाता है, जिसे पूरा करना उनकी प्राथमिकता थी।
मुख्य पार्षद ने आरोप लगाया कि आज उस सपने को साकार करने के बजाय, उसे कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्र की जनता अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर आई है और इस महत्वपूर्ण रेल परियोजना को किसी भी कीमत पर अधर में नहीं लटकने देगी, बल्कि इसके पूर्ण होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
नेताओं के अधूरे सपनों का मुद्दा
सभा को संबोधित करते हुए कॉमरेड ललितेश्वर पासवान ने कहा कि कुशेश्वरनाथ धाम और आसपास के लोगों के साथ सरकार द्वारा सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र और रामविलास पासवान जैसे दूरदर्शी नेताओं ने जिस सकरी-हसनपुर रेल लाइन का सपना देखा था, वह आज भी अधूरा ही नजर आ रहा है, जिससे क्षेत्र का विकास बाधित हो रहा है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से इस परियोजना को उसके मूल रूप में, बिना किसी बदलाव के, शीघ्र पूरा करने की मांग की।सामाजिक कार्यकर्ता सज्जन राय, प्रोफेसर शशिनाथ और पूर्व सरपंच रामसागर चौपाल सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी इस रेल परियोजना के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल एक रेल लाइन का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के समग्र विकास, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर, शिक्षा के बेहतर साधन और स्वास्थ्य सुविधाओं तक सुगम पहुंच से सीधे जुड़ा एक गंभीर और संवेदनशील सवाल है।
सांसद के प्रति व्यापारियों में निराशा
वहीं, व्यवसायी संघ के अध्यक्ष दिलीप कुमार सोनी ने अपनी गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि सांसद शांभवी चौधरी को चुनने से लोगों को यह प्रबल उम्मीद थी कि रेल लाइन के साथ-साथ क्षेत्र में अन्य बुनियादी सुविधाएं भी मिलेंगी। लेकिन उनका यह सपना अभी तक अधूरा ही रह गया है, क्योंकि सांसद महोदया केवल किसी विशेष कार्यक्रम में बुलाने पर ही आती हैं और जमीनी स्तर पर सक्रियता कम दिखती है।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी प्रशांत कुमार ने महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि हरिनगर से कुशेश्वरस्थान के बीच मात्र चार से पांच किलोमीटर रेल लाइन का निर्माण शेष है। उन्होंने आरोप लगाया कि तथाकथित पक्षी विहार के नाम पर इस परियोजना को जानबूझकर रोककर लाखों लोगों को गुमराह किया जा रहा है, जो क्षेत्र के विकास में एक बड़ी बाधा है और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।प्रशांत कुमार ने घोषणा की कि यह आंदोलन केवल एक दिन की प्रतीकात्मक बंदी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चरणबद्ध तरीके से आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि जब तक पूर्व निर्धारित मार्ग पर रेल परियोजना का कार्य शुरू नहीं हो जाता और कुशेश्वरस्थान को रेल मानचित्र पर नहीं लाया जाता, तब तक वे अपना संघर्ष पूरी ताकत से जारी रखेंगे।आंदोलन के अगले चरण के तहत 17 जून को वैष्णवी दुर्गा मंदिर परिसर में एक विशाल महापंचायत आयोजित की जाएगी। इसमें क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, किसानों, युवाओं और आम नागरिकों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा, ताकि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर एक व्यापक सहमति बन सके और आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जा सके।बाजार बंदी और प्रदर्शन के दौरान भूषण हजारी, विजय पासवान, कुमार शेखर, कक्कू अग्रवाल, गौरी शंकर चौधरी सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। सभी आंदोलनकारियों ने एकजुट होकर सकरी-हसनपुर रेल परियोजना को पुराने चयनित मार्ग से पूरा करने और कुशेश्वरस्थान में जल्द रेल सेवा शुरू करने की अपनी मांग दोहराई, ताकि क्षेत्र का पिछड़ापन दूर हो सके। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें






