
Kusheshwarsthan News: जिस गंगा में डुबकी लगाकर पाप धोने की बात होती है, आज उसी की ‘शिवगंगा’ अपने उद्धार का इंतजार कर रही है। व्यवस्था के दावों और हकीकत के बीच का फासला यहां मीलों लंबा नजर आता है।
Kusheshwarsthan News: आस्था पर भारी अव्यवस्था
मिथिला के बाबाधाम के रूप में विख्यात कुशेश्वरस्थान शिव मंदिर, जहाँ हर दिन आस्था का सैलाब उमड़ता है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु महादेव के दर्शन से पहले मंदिर के ठीक सामने स्थित पवित्र शिवगंगा में डुबकी लगाकर खुद को शुद्ध करते हैं। लेकिन विडंबना देखिए, जो शिवगंगा श्रद्धालुओं के लिए शुद्धिकरण का स्रोत है, वह आज खुद प्रदूषण और बदहाली का शिकार हो चुकी है। इसका पानी इतना दूषित और बदबूदार हो गया है कि इसमें स्नान करना किसी बीमारी को दावत देने जैसा है।
हैरानी की बात तो यह है कि इस पवित्र सरोवर के कायाकल्प और सफाई के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों रुपए खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन, ये सारे प्रयास कागजों तक ही सीमित नजर आते हैं, क्योंकि जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शिवगंगा का ठहरा हुआ पानी अब हरे रंग का हो चुका है और इससे उठती दुर्गंध ने श्रद्धालुओं की परेशानी और बढ़ा दी है।
सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति?
घाट पर पसरी गंदगी और पानी की खराब हालत को देखकर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं में स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन के खिलाफ गहरा रोष है। उनका कहना है कि एक तरफ सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर कुशेश्वरस्थान जैसे बड़े आस्था के केंद्र पर भक्तों को मूलभूत स्वच्छता भी नसीब नहीं हो रही है। इस पवित्र शिवगंगा घाट की ऐसी दुर्दशा देखकर हर कोई निराश है।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने एक स्वर में प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी मांग है कि शिवगंगा की सफाई पर अब तक खर्च हुई राशि की पारदर्शिता के साथ जांच की जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो। साथ ही, तत्काल प्रभाव से सरोवर की सफाई करवाकर इसमें स्वच्छ जल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आस्था के इस केंद्र की पवित्रता बनी रहे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


