

Laheriasarai Saharsa New Rail Line: मिथिला की पटरियों पर अब विकास की एक्सप्रेस दौड़ने को तैयार है, क्योंकि दशकों का इंतजार खत्म होने की कगार पर है और जल्द ही केंद्र सरकार की ओर से इस क्षेत्र को एक ऐतिहासिक सौगात मिलने जा रही है।
दरभंगा सहित पूरे मिथिलांचल के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। आजादी के बाद से ही रेलवे के क्षेत्र में हो रहे क्रांतिकारी बदलावों का लाभ अब इस क्षेत्र को और बड़े पैमाने पर मिलने वाला है। लहेरियासराय से सहरसा तक प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित नई रेल लाइन की स्वीकृति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। रेल मंत्रालय द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को नीति आयोग से जल्द ही हरी झंडी मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद यह नई रेल लाइन धरातल पर आकार लेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस महत्वपूर्ण परियोजना के संबंध में जानकारी देते हुए दरभंगा के सांसद और रेलवे स्थायी समिति के सदस्य डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने बताया कि केंद्र सरकार मिथिला के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि रेल मंत्रालय ने लहेरियासराय से सहरसा तक लगभग 95 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन की मंजूरी के लिए सभी आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा कर लिया है।
पूर्वोत्तर का वैकल्पिक मार्ग बनेगी Laheriasarai Saharsa New Rail Line
सांसद डॉ. ठाकुर ने इस प्रस्तावित रेल लाइन को मिथिला क्षेत्र के लिए एक लाइफलाइन बताया है। उन्होंने इसके रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह लाइन पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक रेल मार्ग के रूप में काम करेगी। यह नई लाइन लहेरियासराय से सहरसा होते हुए पूर्णिया और अररिया के रास्ते पूर्वोत्तर क्षेत्र से जुड़ेगी।
इसके बनने से समस्तीपुर-खगड़िया-मानसी होकर जाने वाले मौजूदा रेल मार्ग की तुलना में लगभग 75 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। इससे न केवल यात्रियों के समय की भारी बचत होगी, बल्कि संसाधनों की भी बचत होगी, जो इस क्षेत्र के आर्थिक विकास को एक नई गति प्रदान करेगा।
जानिए क्या है परियोजना की लागत और संरचना
यह परियोजना मिथिला के बुनियादी ढांचे में एक मील का पत्थर साबित होगी। सांसद ने बताया कि लगभग 2376 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाली इस 95 किलोमीटर लंबी रेल लाइन पर कई बड़े निर्माण कार्य होंगे। इस परियोजना के तहत कोसी नदी पर एक हाई-लेवल पुल के साथ-साथ 14 वृहत पुल, 41 छोटे पुल और 72 अंडरपास का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, यात्रियों की सुविधा के लिए 10 क्रॉसिंग स्टेशन और 2 हॉल्ट भी बनाए जाएंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो जाएगी। इस масштаб के कार्य से मिथिला रेलवे विकास को नई दिशा मिलेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इन विधानसभा क्षेत्रों के लिए साबित होगी वरदान
यह नई रेल लाइन दरभंगा लोकसभा क्षेत्र के एक बड़े हिस्से को कवर करेगी, जिसकी कुल लंबाई का लगभग 70 किलोमीटर इसी संसदीय क्षेत्र में पड़ेगा, जबकि शेष 25 किलोमीटर सुपौल और मधेपुरा संसदीय क्षेत्र में आएगा। सांसद डॉ. ठाकुर के अनुसार, यह परियोजना विशेष रूप से दरभंगा, बहादुरपुर, हायाघाट, बेनीपुर, अलीनगर, गौराबौराम और कुशेश्वरस्थान विधानसभा क्षेत्रों के लोगों के लिए वरदान साबित होगी। इन क्षेत्रों के सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए प्रशासनिक, न्यायिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य संबंधी कार्यों के लिए जिला मुख्यालय दरभंगा आना-जाना बेहद सुगम हो जाएगा।
सांसद ने इस परियोजना के लिए अपने निरंतर प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस रेल लाइन की स्वीकृति के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से व्यक्तिगत रूप से मिलकर और पत्रों के माध्यम से लगातार आग्रह किया था। उन्होंने रेलवे की स्थायी समिति और जोनल स्तर की बैठकों में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। दरभंगा में चल रही अन्य रेलवे परियोजनाओं को भी समय पर पूरा करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


