
Lalit Yadav Mother Demise: जीवन की पाठशाला में मां एक ऐसा वृक्ष है, जिसकी छाया में हर दुख छोटा लगने लगता है। जब वह वृक्ष ही जड़ से हिल जाए, तो पूरे संसार में सूनापन छा जाता है। कुछ ऐसा ही दृश्य बुधवार को दरभंगा में देखने को मिला। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री ललित यादव की 90 वर्षीय माता भुलरी देवी का बुधवार, 21 जनवरी को दरभंगा स्थित पूर्व विधायक आवास पर निधन हो गया। उनके निधन की खबर से दरभंगा समेत पूरे मिथिलांचल में शोक की लहर दौड़ गई है।
दिवंगत भुलरी देवी पांच संतानों की जननी थीं, जिनमें से एक पुत्र का निधन पहले ही हो चुका था। वे अपने पीछे दो पुत्र और दो पुत्रियां छोड़ गई हैं। जीवन भर संघर्ष, त्याग और ममता की मिसाल रहीं भुलरी देवी को क्षेत्र में एक संस्कारवान, धर्मपरायण और परिवार को जोड़कर रखने वाली आदर्श माता के रूप में सम्मान प्राप्त था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
माता के पार्थिव शरीर के समक्ष खड़े पूर्व मंत्री ललित यादव स्वयं को संभाल नहीं सके और भावुक होकर रो पड़े। एक अनुभवी जननेता का यह मानवीय रूप देख वहां उपस्थित लोगों की आंखें भी भर आईं। यह दृश्य मां और पुत्र के उस अटूट रिश्ते को बयां कर रहा था, जिसे शब्दों में बांध पाना कठिन है। इस दुखद घड़ी में, पूरा मिथिलांचल समाचार जगत भी शोकाकुल है।
Lalit Yadav Mother Demise: पूर्व मंत्री ललित यादव की माता के अंतिम दर्शन
दिवंगत भुलरी देवी का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए तारडीह प्रखंड के तारडीह गांव लाया गया। यहां हजारों की संख्या में लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। गांव में शोक और सन्नाटे का माहौल था, हर चेहरा गमगीन दिख रहा था।
अंतिम दर्शन के दौरान बीस सूत्री अध्यक्ष माधव झा आज़ाद, अंचलाधिकारी दिलीप गुप्ता, राजस्व अधिकारी मधु कुमारी, विभिन्न पंचायतों के मुखिया, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सभी ने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/।
भुलरी देवी: एक प्रेरणादायी जीवन यात्रा
भुलरी देवी का अंतिम संस्कार बुधवार को ही विधि-विधान से संपन्न कर दिया गया। इस अवसर पर राजद के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ एनडीए से जुड़े नेताओं ने भी राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर शोक संवेदना व्यक्त की। उनकी सादगी और पारिवारिक मूल्यों के प्रति समर्पण, समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत रहा।





