
LNMU News: ज्ञान की तपिश में जब शोध की चिंगारी मिलती है, तो नए अविष्कारों का सवेरा होता है। दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां तीन दिनों तक चले मंथन के बाद शोध की एक नई मशाल जलाई गई। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा एवं पुणे स्थित IRISE – IISER के संयुक्त प्रयास से आयोजित ‘कैपिसिटी बिल्डिंग वर्कशॉप फॉर अर्ली करियर रिसर्च लेवल वन’ का शनिवार, 31 जनवरी 2026 को सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस तीन दिवसीय कार्यशाला ने भविष्य के शोधार्थियों को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की।
LNMU News: कार्यशाला में विशेषज्ञों ने दिए शोध के गुर
विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के अंतर्गत शिक्षा विभाग में आयोजित इस कार्यशाला के समापन समारोह में मानविकी संकाय की डीन प्रो. मंजू रॉय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने युवा शोधार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर शिक्षा संकाय के डीन डॉ. शशि भूषण राय ने कहा कि इस तरह की कार्यशाला विश्वविद्यालय में हो रहे शोध को एक नया आयाम देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे विश्वविद्यालय को एक नई पहचान मिलेगी और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वहीं, शिक्षा शास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. एम. ए. हाशमी ने कहा कि यह कार्यशाला शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी, जिससे वे अपने शोध कार्य को सरल एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकेंगे।
शोध को सरल बनाने पर दिया गया जोर
कार्यशाला में पुणे से आई टेक्निकल टीम के विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए। डॉ. मानवा दिवाकर जोशी ने शिक्षण अधिगम में आकलन और मूल्यांकन के बीच के बारीक अंतर को समझाते हुए शोध करने की विस्तृत प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञ डॉ. मिलिंद चौधरी ने तार्किक सोच और समस्या-समाधान की विधियों के माध्यम से जटिल शोध को आसान बनाने पर जोर दिया। इस पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन प्रो. निधि वत्स ने बड़ी ही खूबसूरती से किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कार्यक्रम के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वाले शोधार्थी सुबेश ठाकुर, मो. वकार, श्रीनिवास एवं पवन को विभागाध्यक्ष डॉ. एम. ए. हाशमी द्वारा मोमेंटो देकर सम्मानित भी किया गया, जिससे युवा शोधकर्ताओं का उत्साहवर्धन हुआ। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में अनूप, आरिफ अहमद, राकेश, निशांत, सर्वेश, समेत दर्जनों शोधार्थियों की भूमिका सराहनीय रही।


