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विवादों में LNMU, पहली बार हो रहा है ऐसा?

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ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला रजिस्ट्रार डॉ. अजय कुमार पंडित की स्वास्थ्य जांच और प्रभार ग्रहण करने से जुड़ा है।

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क्या है मामला?

डॉ. अजय कुमार पंडित ने 30 अक्टूबर से स्वास्थ्य कारणों से अवकाश लिया था और अपना प्रभार प्रो. विजय कुमार यादव को सौंप दिया था। इलाज करवाकर लौटने के बाद उन्होंने 21 दिसंबर को विश्वविद्यालय में योगदान देने की कोशिश की, लेकिन फिटनेस सर्टिफिकेट का मुद्दा उठाकर उन्हें प्रभार ग्रहण करने से रोक दिया गया।

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  1. सिविल सर्जन का फिटनेस सर्टिफिकेट:
    डॉ. पंडित ने दरभंगा के सिविल सर्जन से फिटनेस सर्टिफिकेट जमा किया, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया।
  2. न्यूरोसर्जन से प्रमाण पत्र की मांग:
    कार्यकारी रजिस्ट्रार प्रो. विजय कुमार यादव ने डीएमसीएच या पीएमसीएच के सीनियर न्यूरोसर्जन से नया फिटनेस सर्टिफिकेट लाने का निर्देश दिया।

क्या कहा डॉ. अजय कुमार पंडित ने?

डॉ. पंडित ने कहा:

“मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं और विश्वविद्यालय में योगदान देने के लिए तैयार हूं। मैंने मेडिकल बोर्ड के सामने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है। अब फिर से जांच कराने का निर्देश दिया गया है। मैं कुलपति के आदेश का इंतजार कर रहा हूं।”

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राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस विवाद पर भाजपा विधायक संजय सरावगी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा:

“राजभवन के निर्देशानुसार डॉ. पंडित को मुख्यालय पहुंचते ही प्रभार सौंपा जाना चाहिए था। स्वास्थ्य जांच का अड़ंगा लगाकर उन्हें रोका जा रहा है। यह विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार हो रहा है।”

उन्होंने इसे विश्वविद्यालय प्रशासन की मनमानी करार दिया और पहले रजिस्ट्रार कर्नल निशीथ कुमार राय के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि उनके समय में ऐसा विवाद सामने नहीं आया था।


कार्यकारी रजिस्ट्रार का पक्ष

कार्यकारी रजिस्ट्रार प्रो. यादव ने कहा कि:

  • सिविल सर्जन द्वारा दी गई रिपोर्ट अधूरी थी।
  • डॉ. पंडित की न्यूरोलॉजिकल स्थिति की जांच जरूरी है।
  • उनके 30 अक्टूबर के बीमार होने के दावे की पुष्टि नहीं हुई, क्योंकि उन्होंने 5 नवंबर को ही चिकित्सा उपचार की सूचना दी थी।

विवाद का असर

  • विश्वविद्यालय प्रशासन: इस विवाद ने LNMU के प्रशासनिक कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
  • शैक्षणिक सत्र पर असर: रजिस्ट्रार पद से जुड़ा विवाद विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रहा है।
  • छवि पर असर: यह विवाद विश्वविद्यालय की छवि पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

निष्कर्ष

डॉ. अजय कुमार पंडित का कहना है कि वे पूरी तरह स्वस्थ हैं, लेकिन बार-बार जांच कराने की प्रक्रिया ने विवाद को गहरा दिया है। इस मामले में कुलपति की चुप्पी और कार्यकारी रजिस्ट्रार की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक खींचतान ने इस मुद्दे को और जटिल बना दिया है।

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