
Lalit Narayan Mithila University: मिथिला की धरती पर जब संस्कृति की सरिता बहती है, तो सुर, लय और ताल का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। विश्वविद्यालय के संगीत एवं नाट्य विभाग में ‘चैत हो रामा’ कार्यक्रम के आयोजन के साथ ही ऐसा ही मनमोहक दृश्य जीवंत हो उठा, जहां छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रस्तुतियों से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
Lalit Narayan Mithila University के मंच पर लोकगीतों की बहार
विश्वविद्यालय के संगीत एवं नाट्य विभाग द्वारा आयोजित ‘चैत हो रामा’ कार्यक्रम का शुभारंभ संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष एवं अन्य विभागीय शिक्षकों द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर विभाग के पूर्व संकायाध्यक्ष प्रोफेसर पुष्पम नारायण ने अपने संबोधन में चैत्र माह के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह महीना नववर्ष के आगमन का प्रतीक है और पर्वों से भरा होता है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं के लिए यह एक बेहतरीन सीखने का अवसर है।
विभाग में नवनियुक्त शिक्षक डॉ. पुष्कर कुमार झा ने इस आयोजन को विभाग और छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। वहीं, विभागीय शिक्षक डॉ. अभिषेक स्मिथ ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग और छात्र-छात्राओं में निरंतर ऊर्जा बनाए रखते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान राम के जन्म से जुड़े भजन ‘भए प्रगट कृपाला’ के साथ हुई, जिसे ऋषभ कुमार झा, चंद्रप्रकाश झा, सुमन कुमार सिंह, त्रिपुरारी कुमार, चंदन कुमार, मनोज कुमार और सुभाष कुमार ने अपनी सुरीली आवाज में प्रस्तुत किया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इसके बाद छठ पर्व की महिमा को दर्शाते हुए ‘आठही काठ के कोठरिया हो दीनानाथ’ गीत की मनमोहक प्रस्तुति काजल कुमारी, शिवानी कुमारी, पल्लवी झा, शांतिप्रिया, दृष्टि साक्षी, शालिनी प्रियाशी और स्वाति कुमारी द्वारा दी गई।
चैती गीतों की श्रृंखला में ‘चैत मास बोले रे कोयलिया’ को दामिनी कुमारी, आयुषी प्रिया, आकांक्षा सुंदरम, स्नेहा झा और कुमारी अंजली ने मधुरता से गाया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वहीं, ‘सूतल पिया के जगावे हो रामा’ को चिंटू कुमार, अनिकेत, लक्ष्मण, गौतम, कृष्णा, नीतीश और शिवेन्द्र ने सामूहिक रूप से प्रस्तुत कर कार्यक्रम में एक नई जान फूंक दी। कार्यक्रम का समापन ‘अयोध्या में रामजी जनामले हो रामा’ शीर्षक चैती गीत से हुआ, जिसे ममता, पूजा, शबनम, सोनी, मेनका और अनामिका ने गाकर राम जन्म के दृश्य को साकार कर दिया।
नृत्य और वाद्य संगीत का अद्भुत संगम
गायन प्रस्तुतियों के बाद, विभाग की वरिष्ठ शोध-छात्रा एवं भरतनाट्यम नृत्यांगना सोमा मंडल ने ‘श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन’ पर एक सुंदर नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान संगत कलाकारों ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तबला पर चंद्रमणि झा और अनिकेत, हारमोनियम पर ऋषभ कुमार झा और रीतेश कुमार, तथा झाल पर सुमन कुमार सिंह ने बेहतरीन संगति की। अंत में, विभागाध्यक्ष प्रो. लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





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