



Mahashivratri 2024: जब भक्ति का अमृत बरसता है, तो कण-कण शिवमय हो जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा घनश्यामपुर के सिद्ध विद्यापीठ गलमा धाम में देखने को मिलेगा, जहां देवाधिदेव महादेव के विवाह का उत्सव मनाया जाएगा। महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर, गलमा धाम में भव्य शिव विवाह बारात के साथ-साथ द्वादश ज्योतिर्लिंग पर महारुद्राभिषेक का आयोजन किया जाएगा, जिसकी तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं।
Mahashivratri 2024: जानें क्या है पूरा कार्यक्रम
मंदिर के संस्थापक और विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय प्रबंध समिति के सदस्य, पंडित जिवेश्वर मिश्र ने इस आयोजन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 15 फरवरी को एक भव्य शिव विवाह बारात का आयोजन किया जाएगा। यह बारात पुनहद ग्राम पंचायत के पश्चिमी टोले में स्थित ओम मंदिर से शुरू होगी। यहां से गाजे-बाजे के साथ ग्राम भ्रमण करते हुए यह बारात लक्ष्मीनारायण टोल, पुनहद पूर्वी टोला और नवटोल से होकर गुजरेगी और अंत में सिद्ध विद्यापीठ गलमा धाम पहुंचेगी। धाम में बारातियों के स्वागत के लिए दूर-दराज से आए साधकों और साधिकाओं की टोलियां मौजूद रहेंगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यहां पंडित जिवेश्वर मिश्र शिव विवाह के महत्व पर अपना उद्बोधन देंगे।
इस भव्य आयोजन की तैयारियों में जुटे क्रीड़ा भारती के उत्तर बिहार प्रांत उपाध्यक्ष, रविंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विवाह समारोह के बाद रात्रि के चारों पहर में साधकों द्वारा महारुद्राभिषेक किया जाएगा। इस दौरान यज्ञ और हवन से पूरा वातावरण भक्तिमय और पावन हो जाएगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
सामाजिक समरसता का प्रतीक है शिव विवाह
पंडित जिवेश्वर मिश्र ने महाशिवरात्रि को सनातन शक्ति के जागरण का एक महा अभियान बताया। उन्होंने कहा कि महादेव का पूजन और उनके चरित्र का अनुसरण करने से ही ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का मार्ग प्रशस्त होता है। भोलेनाथ ने समाज कल्याण के लिए विष का पान किया था, जो हमें त्याग और लोक कल्याण की प्रेरणा देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पर्व समाज में व्याप्त छुआछूत, ऊंच-नीच और धार्मिक भेदभाव जैसी कुरीतियों को समाप्त करने का संदेश देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। संगठित समाज से ही एक संगठित राष्ट्र का निर्माण संभव है।
इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए लक्ष्मी प्रसाद सिंह, रामजीवन सिंह, वैद्यनाथ सिंह ‘नुनु बाबू’, देव कुमार सिंह, श्याम किशोर सिंह, सहदेव यादव, बलराम ठाकुर, माधवेंद्र कुमार, आदित्य कुमार सिंह, मुकेश कुमार और लाडली कुमारी समेत कई धर्मानुरागी जुटे हुए हैं। मंदिर परिसर में होने वाले सभी अनुष्ठान श्री गुरुदेव के मार्गदर्शन और प्रधान पुजारी की देखरेख में संपन्न किए जाएंगे।




