



सिंहवाड़ा के महेशपट्टी गांव में स्थित एक स्कूल में एडमिट कार्ड वितरण को लेकर छात्रों और प्रबंधन के बीच विवाद ने हंगामे का रूप ले लिया। स्कूल के दो भागों में बंट जाने और पढ़ाई बाधित होने के बावजूद बकाया फीस जमा करने की शर्त पर छात्रों को एडमिट कार्ड देने की बात कही गई, जिससे आक्रोशित छात्रों ने नारेबाजी की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
महेशपट्टी स्कूल: एडमिट कार्ड के लिए छात्रों का हंगामा
शंकरपुर पंचायत के महेशपट्टी गांव में स्थित विद्यालय में उस समय अफरातफरी मच गई जब एडमिट कार्ड लेने पहुंचे छात्रों को स्कूल प्रबंधन द्वारा बताया गया कि बकाया फीस जमा करने पर ही उन्हें एडमिट कार्ड दिया जाएगा। इस बात से आक्रोशित छात्रों ने विद्यालय परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। छात्रों का कहना था कि स्वामित्व विवाद के चलते स्कूल दो हिस्सों में बंट गया है, जिस कारण महीनों से उनकी पढ़ाई बाधित रही है। ऐसे में फीस जमा करने का सवाल ही नहीं उठता।
सीबीएसई बोर्ड के एप्लीकेशन का दावा करने वाले इस स्कूल में छात्रों का हंगामा बढ़ता देख स्थानीय सिंहवाड़ा थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भी मामले में हस्तक्षेप करते हुए मौजूद छात्रों को उनके एडमिट कार्ड दिलवाने में सहायता की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस मामले पर बीईओ विनोद कुमार ने बताया कि यह एक निजी स्कूल है जिसे जिला से आठवीं कक्षा तक के संचालन की स्वीकृति प्राप्त है। उन्होंने कहा कि बिना एप्लीकेशन के नौवीं और दसवीं कक्षा का संचालन करना नियमों के विरुद्ध है और इसे चोरी-छिपे संचालित किया जा रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़
छात्रों ने बताया कि उनके एडमिट कार्ड पर संत उमेश फाउंडेशन स्कूल के छात्रों के स्कूल के नाम की जगह रामकृष्णा विद्यापीठ वासुदेवपुर दरभंगा अंकित है। साथ ही, परीक्षा केंद्र के रूप में पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय दरभंगा का नाम दिया गया है। अभिभावकों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में कुछ ऐसे निजी विद्यालय संचालित हो रहे हैं जो नियमों का उल्लंघन कर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। यह स्थिति चिंताजनक है और इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
यह घटना शिक्षा प्रणाली में व्याप्त खामियों और निजी स्कूलों के मनमाने रवैये को उजागर करती है। छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए ऐसे विद्यालयों पर कड़ी निगरानी और सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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