
CTET Exam: मिथिला की धरती से उठी मांग अब दिल्ली के गलियारों से होते हुए शिक्षा के सबसे बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाने को तैयार है। जी हां, अब केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा में मैथिली भाषा का डंका बजेगा।
केंद्र सरकार ने मैथिली भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी सौगात दी है। दरभंगा के सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर के प्रयासों के बाद अब अगले सत्र से केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET Exam) में मैथिली भाषा को भी शामिल कर लिया जाएगा। यह निर्णय लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलेगा और मैथिली को शिक्षा के क्षेत्र में एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा। इस महत्वपूर्ण विषय पर सांसद डॉ. ठाकुर ने मंगलवार को केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी से संसद भवन में मुलाकात कर विस्तृत चर्चा की।
अगले सत्र से CTET Exam में शामिल होगी मैथिली
सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर और केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी के बीच हुई बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि मैथिली भाषा को केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल करने की सभी औपचारिकताओं पर तेजी से काम चल रहा है। केंद्रीय मंत्री ने सांसद को आश्वासन दिया कि अगले सत्र से होने वाली परीक्षा में मैथिली भाषा एक विकल्प के रूप में मौजूद रहेगी। इस कदम से देश भर के सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का सपना देख रहे मैथिली भाषी युवाओं को सीधी राहत मिलेगी और उनके लिए अवसरों का विस्तार होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस फैसले से न केवल शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में भाषाई विविधता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस दृष्टिकोण के भी अनुरूप है, जो मातृभाषा में शिक्षा को प्रोत्साहित करती है। यह मिथिला और मैथिली के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।
स्कूलों में भी छठी से दसवीं तक होगी मैथिली में पढ़ाई
शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल करने के साथ-साथ, केंद्र सरकार मैथिली भाषी क्षेत्रों के विद्यालयों में कक्षा 6 से 10वीं तक की पढ़ाई मैथिली में शुरू कराने की भी पहल कर रही है। केंद्रीय राज्य मंत्री ने जानकारी दी कि इसके लिए आवश्यक पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने और पाठ्यक्रम को विकसित करने का काम भी जल्द शुरू किया जाएगा। यह कदम बच्चों को अपनी मातृभाषा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में मदद करेगा, जिससे उनकी सीखने की क्षमता और बेहतर होगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस योजना के लागू होने से न केवल मैथिली भाषा का संरक्षण होगा, बल्कि नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और साहित्य से और गहराई से जुड़ सकेगी।
सांसद गोपाल जी ठाकुर के प्रयास लाए रंग
सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर इस मांग को लेकर लंबे समय से संघर्षरत थे। उन्होंने बताया कि वे 13 जनवरी 2022, 13 मार्च 2023, और इस साल 6 जून 2024 समेत कई मौकों पर विभागीय मंत्रियों को पत्र लिखकर और लोकसभा में तारांकित प्रश्नों के माध्यम से इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। उनके निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि आज केंद्र सरकार ने इस पर सकारात्मक रुख अपनाया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सांसद ने इस ऐतिहासिक पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का आभार व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने हमेशा मिथिला और मैथिली के विकास को प्राथमिकता दी है। मैथिली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने से लेकर सीबीएसई पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने और अब राष्ट्रपति भवन की वेबसाइट पर भी जगह देने तक, हर कदम ने इस भाषा का मान बढ़ाया है। मुलाकात के दौरान सांसद ने मंत्री से युवाओं के लिए कौशल विकास योजनाओं पर भी चर्चा की, ताकि क्षेत्र के नौजवानों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण मिल सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह मिथिला के समग्र विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।



