



Darbhanga Court News: इंसाफ की चौखट पर एक संत के ‘पाप’ का हिसाब-किताब चल रहा है, जहां हर तारीख के साथ एक नई कहानी लिखी जा रही है। नाबालिग से दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले में आरोपी संत रामउदित दास उर्फ मौनी बाबा की अग्रिम जमानत याचिका पर सोमवार को पाक्सो के विशेष न्यायाधीश प्रोतिमा परिहार की अदालत में सुनवाई हुई।
अदालत में आंशिक सुनवाई के बाद, न्यायाधीश ने महिला थानाध्यक्ष को मामले की अद्यतन केस दैनिकी (Case Diary) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, अदालत ने पीड़िता को नोटिस जारी करने का भी आदेश पारित किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।, मौनी बाबा की अग्रिम जमानत याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 16 फरवरी की तिथि निर्धारित की गई है।
Darbhanga Court News: जानिए क्या है पूरा मामला
यह पूरा प्रकरण महिला थाना कांड संख्या 182/25 से जुड़ा है। प्राथमिकी के अनुसार, आरोपी मौनी बाबा पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(2), 352, 89, 64(आई) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 4 और 6 के तहत गंभीर आरोप दर्ज हैं। पीड़िता का आरोप है कि मौनी बाबा ने उसकी शादी अपने भतीजे और शिष्य श्रवण दास उर्फ श्रवण ठाकुर से जबरन करा दी थी। श्रवण दास इस मामले में 17 जनवरी से न्यायिक हिरासत में है और उसकी जमानत याचिका पहले ही 4 फरवरी को विशेष कोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी है।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी ने उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया। इसी दबाव में उसे दो बार गर्भपात कराने के लिए भी मजबूर किया गया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर कथावाचक श्रवण दास को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
आरोपी पक्ष ने बताया साजिश, पुलिस कर रही जांच
वहीं, दूसरी ओर आरोपी पक्ष ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि उन्हें फंसाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपों की गहनता से जांच की जा रही है और जो भी साक्ष्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस मामले में लगी धाराएं बेहद गंभीर हैं। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 4 में न्यूनतम 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है, जबकि धारा 6 में यह सजा 20 वर्ष से लेकर मृत्युदंड तक हो सकती है। इसी तरह, बीएनएस की अन्य धाराओं में भी 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। अब सबकी निगाहें 16 फरवरी को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।


