
Mithila University Youth Festival: जीवन की भागदौड़ में जब मन पर भौतिकता का बोझ हावी होने लगे, तब कला और संस्कृति का अमृत ही आत्मा को सींचता है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में इन दिनों ‘अनन्तनाद’ इसी अमृत की धारा बहा रहा है, जहां युवा अपनी ऊर्जा और रचनात्मकता से पूरे परिसर को जीवंत कर रहे हैं।
मिथिला विश्वविद्यालय युवा महोत्सव ‘अनन्तनाद’: संस्कृति और कला का महाकुंभ
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा परिसर में 10 से 13 जनवरी, 2026 तक आयोजित चार दिवसीय इंटर कॉलेज युवा महोत्सव 2025-26 “अनन्तनाद” अपने निर्धारित शेड्यूल के अनुसार दूसरे दिन भी जारी रहा। पीजी एथलेटिक्स एवं डॉ एपीजे अब्दुल कलाम डब्ल्यूआईटी, दरभंगा द्वारा आयोजित इस भव्य आयोजन में विभिन्न सांस्कृतिक एवं बौद्धिक प्रतियोगिताएं देखने को मिलीं।
जुबली हॉल में फोक आर्केस्ट्रा, ग्रुप सॉन्ग इंडियन, स्किट और वन एक्ट प्ले जैसी मनमोहक प्रस्तुतियां हुईं, जबकि विश्वविद्यालय जन्तु विज्ञान विभाग में क्विज, एलोक्यूशन (अंग्रेजी एवं हिन्दी), ऑन स्पॉट पेंटिंग, कार्टूनिंग एवं पोस्टर मेकिंग जैसी रचनात्मक स्पर्धाओं का आयोजन किया गया। वहीं, विश्वविद्यालय भौतिकी विभाग में वेस्टर्न वोकल सोलो, क्लासिकल वोकल सोलो, लाइट वोकल सोलो एवं वेस्टर्न इंस्ट्रूमेंट सोलो ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर डब्ल्यूआईटी निदेशक प्रो अजय नाथ झा, खेल पदाधिकारी प्रो अमृत कुमार झा, आयोजन सचिव प्रियंका राय, डॉ देवेन्द्र वर्मा, प्रो लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ सहित विभिन्न विभागों के निदेशक, समन्वयक, प्रधानाचार्य, एनएसएस समन्वयक और कई अन्य गणमान्य शिक्षक एवं प्रतिभागी छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन नेहा कुमारी ने किया, जिसमें सुमित कुमार झा तथा मनीष राज ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया।डॉ एपीजे अब्दुल कलाम डब्ल्यूआईटी, दरभंगा के निदेशक सह आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो अजय नाथ झा ने प्रतियोगिताओं का शुभारंभ करते हुए कहा कि आज के भौतिकवादी, दौड़-भाग और मोबाइल के युग में युवाओं के लिए मनोरंजन, सांस्कृतिक परंपरा एवं मानव मूल्यों की रक्षा हेतु युवा महोत्सव का आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा, “मानव जीवन स्वयं एक अभिनय है और बच्चों के जन्म काल में ही उनके रोने के स्वर से उनके स्वास्थ्य का ज्ञान हो जाता है।” हमारे जीवन में गीत, नृत्य, प्रहसन, अभिनय, मूक प्रदर्शन, सामान्य ज्ञान, वाद-विवाद आदि का विशेष महत्व है, और यह महोत्सव छात्र-छात्राओं की क्षमता एवं उत्साह को प्रदर्शित करने वाला एक आईना है आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मिथिला विश्वविद्यालय युवा महोत्सव: सांस्कृतिक विरासत की नई पौध
विश्वविद्यालय के खेल पदाधिकारी सह सांस्कृतिक समन्वयक प्रो अमित कुमार झा ने इस आयोजन को छात्र-छात्राओं में संज्ञानात्मक स्फूर्ति, नवाचार एवं लचीलेपन का सृजनात्मक संचार बताया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे सबसे बड़े युवा देश में, बिहार सबसे युवा प्रदेश है, और यहां की युवा प्रतिभा की तलाश एवं हौसला अफजाई के लिए ऐसे आयोजन अत्यावश्यक हैं। उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय के निर्धारित कैलेंडर के अनुसार, पूरे वर्ष विभिन्न कॉलेजों में खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन होता रहता है। यह गर्व की बात है कि पिछले वर्ष 2024-25 में मिथिला विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक टोली ने अखिल भारतीय युवा महोत्सव की प्रत्येक विधा में पदक प्राप्त कर अपनी पहचान बनाई थी।पीजी एथलेटिक्स की अध्यक्षा सह आयोजन सचिव डॉ प्रियंका राय ने बताया कि इस बार कुल 29 इवेंट आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर तथा बेगूसराय जिलों के कॉलेजों की टीमें भाग ले रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक आयोजित प्रतियोगिता के परिणाम निर्णायक मंडल द्वारा गुप्त रूप से सीलबंद लिफाफे में जमा किए जा रहे हैं, जिनकी घोषणा समापन समारोह में 13 जनवरी को सामूहिक रूप से की जाएगी। इस आयोजन के माध्यम से क्षेत्रीय सांस्कृतिक विविधता को मंच मिल रहा है, जो न केवल छात्रों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर दे रहा है बल्कि उन्हें एक-दूसरे से सीखने और प्रेरित होने का भी मौका दे रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
आयोजन का व्यापक प्रभाव
यह युवा महोत्सव केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने और भविष्य के लिए रचनात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां विभिन्न क्षेत्रों की युवा प्रतिभाएं एक मंच पर एकत्रित होती हैं।




