

Amas Darbhanga Expressway: दरभंगा देशज टाइम्स। विकास की वो कैसी रफ्तार जो अपनों को ही पीछे छोड़ दे? कुछ ऐसा ही हाल दरभंगा के हायाघाट प्रखंड स्थित घरारी गांव का है, जहां आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे स्थानीय लोगों के लिए सुविधा की जगह दुविधा का सबब बन गया है। आलम यह है कि एक सर्विस रोड के लिए ग्रामीणों से लेकर सांसद तक को आवाज उठानी पड़ रही है।
Amas Darbhanga Expressway: घरारी गांव के पास सर्विस रोड की मांग क्यों?
मामला आमस-दरभंगा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 119 D) के निर्माण से जुड़ा है। इस एक्सप्रेसवे के पैकेज-4 के तहत दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड स्थित घरारी गांव के समीप (CH संख्या 69+765) पर सर्विस रोड का निर्माण नहीं किया गया है। इसके चलते स्थानीय ग्रामीणों को आवागमन में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर भाकपा (माले) सांसद राजाराम सिंह ने केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सांसद ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि सर्विस रोड के अभाव में आपातकालीन स्थिति में मरीजों को डीएमसीएच या पटना ले जाने में अत्यधिक देरी होती है, जो कई बार जानलेवा साबित हो चुकी है। घरारी गांव समेत आसपास के क्षेत्रों की लगभग 10 हजार की आबादी इस समस्या से सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। इसलिए, जनहित को ध्यान में रखते हुए इस महत्वपूर्ण सर्विस रोड निर्माण को जल्द से जल्द स्वीकृति दी जानी चाहिए।
सड़क से लेकर सदन तक गूंजेगा मुद्दा, 9 फरवरी को मार्च
इस मामले पर जानकारी देते हुए भाकपा (माले) के जिला सचिव बैद्यनाथ यादव ने बताया कि एक्सप्रेसवे के निर्माण से घरारी गांव के किसान और स्थानीय निवासी काफी परेशान हैं। उनकी मांगों को अनसुना किया जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसी समस्या को लेकर आगामी 9 फरवरी को किसान महासभा के बैनर तले जिला मुख्यालय पर एक विशाल मार्च का आयोजन किया जाएगा। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित कराना और इसका तत्काल समाधान निकलवाना है। यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां यहां क्लिक करें। प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच यह खींचतान कब तक चलती है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल हजारों ग्रामीणों की उम्मीदें सांसद की चिट्ठी और आगामी आंदोलन पर टिकी हैं।

