

दरभंगा। “सतुआ के मुठरा जे सानथि, चूड़ा दहिक मर्म की जानथि ” व्यंग्य रचना की पाठ से आदर्श मध्य विद्यालय लहेरियासराय में मैथिली साहित्य के दिग्गज लेखक प्रो. हरिमोहन झा की (Muthara Je Santhi of Satua in Darbhanga) और हिन्दी के साहित्य के उपन्यासकार वृन्दावनलाल वर्मा एवं अमृतलाल नागर की पुण्यतिथि मनाई गई।
प्रधानाध्यापक संजीव कुमार मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में तीनों विभूतियों के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। शिक्षक अरुण कुमार चौधरी ने रचनाओं से साहित्य का संवर्धन करने वाले तीनों साहित्यकारों के राष्ट्रीय अवदानों से बच्चों को अवगत कराया।

उन्होंने कहा कि प्रखर उपन्यासकार एवं निबंधकार वृन्दावन लाल वर्मा ने मृगनयनी झांसी की रानी, कचनार, रामगढ़ की रानी आदि उपन्यास लेखन किया। वहीं बाल साहित्य, हास्य व्यंग्य और कहानी संग्रह वाटिका प्रकाशित कर अमृतलाल नागर एक कालजयी साहित्यकार के रुप में हमारे बीच अमर हैं।
वैशाली जिले के वाजितपुर निवासी प्रो. हरिमोहन झा ने कन्यादान, द्विरागमन, उपन्यास की रचना, खट्टर ककाक तरंग व्यंग्य की रचना के माध्यम से मैथिली भाषा को घर-घर की भाषा बनाया।
वहीं, श्री झा की रचना हिन्दी, गुजराती, मराठी, कन्नड़, तेलगू में अनुवादित हुई। सतूआ के मुठरा जे सानथि, चूड़ा दहिक मर्म की जानथि। हम आमिल देल राहड़िक दालि खाई छी।
कहियो छुरी-कांटा सं खाइत देखल अछि। मौके पर प्रशिक्षु शिक्षक एकांश कुमार, चंद्रकांत कुमार,,चन्दन कुमार, जवाहर लाल दास,,राजेश राज,सौरभ कुमार, मोनिका, खुशबू, खालिदा नाज समेत विद्यालय के छात्र मौजूद थे।



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