

Hand Block Printing: नाबार्ड के CGM ने दिया GI टैग का भरोसा, कारीगरों के खिले चेहरे
Hand Block Printing: स्याही में डूबी परंपरा जब कपड़ों पर उतरती है तो एक जीवंत विरासत का जन्म होता है, और अब यही विरासत बिहार के पिंडारुछ गांव से निकलकर वैश्विक फैशन जगत पर छा जाने को तैयार है। सोमवार को कमतौल के पिंडारुछ स्थित अनादि उद्यम विकास संस्थान के पांचवें स्थापना दिवस पर इस कला को नई ऊंचाई देने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने कारीगरों के काम को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग दिलाने का भरोसा दिया।
Hand Block Printing को GI टैग दिलाने का होगा प्रयास
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने कहा कि हैंडीक्राफ्ट और हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग एक जीवंत विरासत है, जो अब सस्टेनेबल फैशन और लक्जरी होम डेकोर के रूप में अपनी वैश्विक पहचान बना रही है। उन्होंने संस्थान की पहल की सराहना करते हुए कहा कि यहां के कारीगरों द्वारा किए जा रहे कार्यों को वैश्विक मंच मिले, इसके लिए जीआई टैग दिलाने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह कला न केवल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखती है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि चुनौतियों के बावजूद यह क्षेत्र नवाचार के साथ आगे बढ़ रहा है और नाबार्ड भी इसमें अपना पूरा सहयोग देता रहेगा।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर नाबार्ड के महाप्रबंधक सहित 29 जिलों के जिला विकास प्रबंधक भी उपस्थित थे, जो इस पहल के व्यापक महत्व को दर्शाता है। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। इसके बाद मिथिला की गौरवशाली परंपरा के अनुसार आए हुए सभी अतिथियों को पाग और चादर से सम्मानित किया गया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
अनादि फाउंडेशन के विजन पर हुई चर्चा
कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर प्रदीप कांत चौधरी ने अनादि फाउंडेशन की अब तक की यात्रा और भविष्य के विजन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे संस्थान स्थानीय कारीगरों को जोड़कर इस पारंपरिक हैंडीक्राफ्ट कला को पुनर्जीवित करने का काम कर रहा है। इस मौके पर ललित कुमार चौधरी, सरपंच मिथिलेश मिश्र, मणिकांत मिश्र, और अमरेंद्र कुमार ठाकुर सहित कई अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सभी ने इस प्रयास की सराहना की और इसे ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।


