

कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में रविवार को,ओनली वन अर्थ’ थीम के साथ मनाया गया। मौके पर उन्होंने पर्यावरण में फैला प्रदूषण पर उन्होंने कहा की प्रदूषण धीरे-धीरे वैश्विक संकट बनते जा रहा है। हम अगर अभी नही संभले जैविक खेती की ओर बढ़कर प्रदूषण को कम करने में वैश्विक स्तर पर काम नहीं हुई तो पृथ्वी से लेकर वायु मंडल व इस पर रहने वाले सभी जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो गया है l
भारत में प्रतिवर्ष लगभग 6 हजार मिलियन टन उपजाऊ मिट्टी अपरदित हो जाती है जिसका असर केवल धरती पर ही नहीं बल्कि सभी तरह के जिव-जंतु, पेड़-पौधे और मानव जाती पर दिखाई पड़ रहा है। वनों की अंधाधुंध कटाई इसका मुख्य कारण है, जिसके परिणाम स्वरूप बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग, चक्रवात, बाढ़, तूफान आदि का खतरा दुनिया पर मंडरा रहा है। इसलिए मृदा का संरक्षण करना बहुत ही जरुरी है l
मृदा संरक्षण का तात्पर्य उन विधियों से है जो मृदा को अपने स्थान से हटने से रोकते हैं मृदा संरक्षण के लिए वनों की रक्षा, वृक्षारोपण, बांध बनाना, भूमि उद्धार, बाढ़ नियंत्रण, पट्टीदार व सीढ़ीदार कृषि इत्यादि पर लोगों में जागरूकता लाने की जरूरत है। वृक्षों की कटाई पर प्रतिबंध-वृक्षारोपण के अतिरिक्त वृक्षों की निर्बाध कटाई को नियंत्रित करने की आवश्यकता है। चिपको आन्दोलन जैसे जग-जागरूकता अभियानों वृक्ष एवं वनों के महत्व को प्रचारित एवं प्रसारित किए जाने की आवश्यकता है ।



