
Panchayat Secretary Strike: से बिहार में सरकारी सिस्टम की कमर टूट गई है। जाले प्रखंड में पंचायत सचिवों की हड़ताल से RTPS काउंटर सूने पड़ गए हैं और आम लोग अपने ज़रूरी कामों के लिए दर-दर भटक रहे हैं। आखिर क्या हैं इनकी मांगें और क्यों गहराता जा रहा है यह संकट?
जाले। राज्य संघ के आह्वान पर बुधवार से Panchayat Secretary Strike पर चले जाने के कारण प्रखंड और अंचल कार्यालयों में सन्नाटा पसरा है। कर्मियों की मौजूदगी के बावजूद आरटीपीएस काउंटर पर कोई काम नहीं हो रहा है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पंचायत सचिव अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
Panchayat Secretary Strike: जानिए क्या हैं पंचायत सचिवों की प्रमुख मांगें
- गृह जिला में स्थानांतरण।
- स्नातक योग्यता का निर्धारण।
- ग्रेड पे 2000 रुपये से बढ़ाकर 4200 रुपये करना।
- प्रति माह 2000 रुपये परिवहन भत्ता।
- बीपीआरओ पद पर प्रोन्नति के लिए 55 वर्ष की उम्र सीमा समाप्त करना।
इस हड़ताल का सीधा असर जन्म, मृत्यु, आय, जाति, आवासीय, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी जैसे महत्वपूर्ण प्रमाण पत्रों के बनने पर पड़ा है। इन कामों के लिए पहुंचे लोगों को बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ रहा है। राजस्व से जुड़े कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। पंचायतों में चल रही सरकारी विकास योजनाओं का क्रियान्वयन भी ठप पड़ गया है, जिससे सरकारी कामकाज प्रभावित हुआ है और विकास की गति धीमी पड़ गई है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
पहले से ही बाधित है अंचल का कामकाज, आमजन बेहाल
गौरतलब है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। अंचल का कार्य पहले से ही बाधित चल रहा है, क्योंकि 11 फरवरी से राजस्व कर्मचारी और 10 मार्च से राजस्व अधिकारी व सीओ भी हड़ताल पर हैं। इन लगातार हो रही हड़तालों के कारण आम लोगों में बेचैनी बढ़ती जा रही है और उन्हें अपने जरूरी कार्यों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। यह स्थिति न सिर्फ सरकारी कामकाज प्रभावित कर रही है, बल्कि जनता के भरोसे को भी ठेस पहुंचा रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।







