
दरभंगा देशज टाइम्स: क्या शिक्षा के मंदिर में अब बच्चों को ‘पैसे दो या घर जाओ’ का फरमान सुनाया जा रहा है? दरभंगा के एक सरकारी मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर छात्र-छात्राओं से मुफ्त मिलने वाली सामग्री के लिए पैसे मांगने के गंभीर आरोप लगे हैं. बात यहीं खत्म नहीं होती, अभिभावकों का दावा है कि पैसे न देने पर बच्चों को स्कूल से भगा दिया जाता है और शौच के लिए भी उन्हें घर भेज दिया जाता है, जिससे उनकी पढ़ाई का कीमती समय बर्बाद हो रहा है.
किताब-कॉपियों के लिए मांगी जा रही थी रकम
यह मामला लहेरियासराय के बाकरगंज स्थित स्वर्णलता लक्ष्मी नारायण खड़गा मध्य विद्यालय से जुड़ा है. अभिभावकों ने प्रधानाध्यापक पर आरोप लगाया है कि वे छात्र-छात्राओं को सरकार द्वारा मुफ्त में दी जाने वाली किताबें, कॉपियां, स्कूल बैग और आई-कार्ड देने के बदले उनसे रुपयों की मांग करते हैं. अभिभावकों का यह भी कहना है कि यदि विद्यार्थी पैसे नहीं देते, तो उन्हें स्कूल से घर वापस भेज दिया जाता है.
सैदनगर अभंडा निवासी अखिलेश यादव की पुत्री, जो तीसरी कक्षा में पढ़ती है, उसने बताया कि प्रधानाचार्य ने उससे 200 रुपये की मांग की थी. पैसे न देने पर उसे शुक्रवार को स्कूल से घर जाने को कह दिया गया था.
नामांकन से लेकर आई-कार्ड तक, हर चीज का दाम!
उसी छात्र की मां पूजा देवी ने भी अपनी शिकायत में बताया कि उनसे कॉपियां देने के नाम पर 50 रुपये, नामांकन के लिए 500 रुपये और आई-कार्ड बनाने के नाम पर 150 रुपये लिए गए. अभिभावकों का कहना है कि यह पूरी तरह से गलत है, क्योंकि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत ये सभी सुविधाएं सरकार द्वारा निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं.
शौचालय में ताला और ‘घर जाओ’ का फरमान
अभिभावकों ने एक और चौंकाने वाला आरोप लगाया है कि विद्यालय के शौचालय में अक्सर ताला लगा रहता है. जब किसी बच्चे को शौच जाने की जरूरत होती है, तो शिक्षक उन्हें घर से होकर आने की बात कहकर वापस भेज देते हैं. उनका कहना है कि इस वजह से बच्चों का कम से कम एक घंटा समय बर्बाद होता है, जिसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ता है. अभिभावकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि शिक्षकों को इन बातों से कोई लेना-देना नहीं होता.
प्रधानाध्यापक नदारद, जांच का आदेश जारी
इन गंभीर आरोपों की जानकारी मिलने के बाद शनिवार को आधा दर्जन से अधिक अभिभावक स्कूल पहुंचे. उन्होंने प्रधानाध्यापक से बात कर स्थिति स्पष्ट करनी चाही, लेकिन वह स्कूल में उपस्थित नहीं थे.
इधर, मामले की जानकारी जिला शिक्षा पदाधिकारी अवधेश कुमार तक पहुंची है. उन्होंने बताया कि उन्हें स्कूल की व्यवस्था के बारे में सूचना मिली है. जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि स्कूल से कॉपी, किताब, ड्रेस, स्कूल बैग और आई-कार्ड जैसी कोई भी सामग्री यदि मिलती है, तो उसके लिए किसी भी तरह का कोई रुपया नहीं लगता है. ये सभी सामान सरकार द्वारा ही उपलब्ध कराए जाते हैं.
उन्होंने कहा कि नगर के बीईओ (प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी) को मामले की जांच का आदेश दिया गया है. जांच रिपोर्ट मिलने के बाद यदि प्रधानाचार्य की संलिप्तता पाई गई, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी.




