
दरभंगा के बिरौल में सड़क की बदहाली पर जनता समेत संगठन अब जागृत। उबाल- फूटा गुस्सा! बिरौल में टूटी सड़कें बनी मुसीबत! मरीज-छात्र बेहाल, मनोर भौराम पंचायत की टूटी-फूटी सड़कों को लेकर सरकार और प्रशासन को अल्टीमेटम। बरसात में तालाब बनी सड़कें! ग्रामीणों का आक्रोश उबाल पर, MSU भी कूदी मैदान में– अबकी बार आंदोलन होगा जोरदार@आरती शंकर,बिरौल-देशज टाइम्स।
मनोर भौराम पंचायत की जर्जर सड़क से लोगों में उबाल, बिरौल प्रशासन से मरम्मती की गुहार, साथ ही आंदोलन का अल्टीमेटम
बिरौल, देशज टाइम्स। MSU के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को बिरौल अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) शशांक राज को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने मनोर भौराम पंचायत की जर्जर सड़कों की तुरंत मरम्मत की मांग रखी।
खराब सड़कों की सूची
ज्ञापन में बताया गया कि पंचायत क्षेत्र की कई मुख्य सड़कें वर्षों से बदहाल स्थिति में हैं, जिनमें शामिल हैं: बंदा से बिजुलिया गांव तक, सिमरा से पछगछिया तक, पछगछिया से बैरमपुर तक, बाबा चौक से सौवां तक। इन सड़कों की स्थिति इतनी खराब है कि राहगीरों, छात्रों, बीमार मरीजों और आम जनों को आवागमन में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
बरसात में और बिगड़ती स्थिति
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बरसात के मौसम में इन सड़कों की हालत और भी भयावह हो जाती है। गड्ढों से भरी सड़कों पर चलना मुश्किल हो जाता है। अक्सर मरीजों को अस्पताल ले जाने और छात्रों को स्कूल-कॉलेज आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
यूनियन नेताओं का बयान
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रदेश सचिव नवीन सहनी, वरिष्ठ नेता मिथिलेश यादव एवं कुमार गौरव ने किया। उन्होंने कहा कि इन मार्गों की स्थिति को लेकर स्थानीय जनता लंबे समय से संघर्ष कर रही है, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
“यदि शीघ्र सड़क मरम्मत का कार्य प्रारंभ नहीं किया गया तो स्थानीय जनता के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।” – यूनियन नेताओं का बयान
ग्रामीणों में आक्रोश, कहा-जीवन-यापन कठिन हो गया है
स्थानीय ग्रामीणों ने भी प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया। उनका कहना है कि सड़कों की उपेक्षा के कारण न केवल जीवन-यापन कठिन हो गया है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों और शिक्षा पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। किसान अपनी फसल मंडी तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं, वहीं छात्रों की पढ़ाई पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
एसडीओ शशांक राज का मिला आश्वासन
ज्ञापन मिलने के बाद एसडीओ शशांक राज ने कहा कि प्रशासन जर्जर सड़कों की मरम्मती पर गंभीरता से विचार कर रहा है और जल्द ही इस दिशा में कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि सड़क मरम्मत कार्य को प्राथमिकता पर लिया जाएगा।
सड़कें क्यों हैं इतनी महत्वपूर्ण?
भारत में ग्रामीण सड़कों का महत्व सिर्फ आवागमन तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत ग्रामीण संपर्क को आर्थिक और सामाजिक विकास की रीढ़ माना गया है। ग्रामीण सड़कों की खराब स्थिति से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बाधित होती है। शिक्षा के अवसरों पर असर पड़ता है। किसानों की आजीविका प्रभावित होती है। स्थानीय व्यापार और बाजार तक पहुंच में दिक्कत आती है।
जनता की उम्मीदें
ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि प्रशासन शीघ्र सड़क निर्माण या मरम्मती का कार्य प्रारंभ करेगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो क्षेत्र में आंदोलन की स्थिति बन सकती है। स्थानीय नेताओं और यूनियन कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि अब इस मुद्दे पर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।