दरभंगा। अक्सर ‘जनता के सेवक’ कहे जाने वाले पुलिसकर्मियों का कड़क अंदाज़ और रूखा व्यवहार आम लोगों के बीच उनकी छवि को धूमिल करता रहा है। लेकिन अब इस धारणा को बदलने की पहल हुई है। सवाल यह है कि क्या यह बदलाव ज़मीन पर भी दिखेगा और क्या आम जनता को अब थाने में सम्मान मिलेगा?
पुलिस और आम जनता के बीच अक्सर एक अजीब सा फासला बना रहता है। इस फासले की एक बड़ी वजह पुलिस का वो ‘हड़काने’ वाला लहजा और बेवजह की सख़्ती है, जिससे लोग पुलिस के पास जाने से भी कतराते हैं। थाने में शिकायत लेकर पहुंचने वाले लोगों को कई बार अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ता है, जिससे न्याय की आस में आए लोग और अधिक निराश हो जाते हैं।
आखिर क्यों ज़रूरी हुआ बदलाव?
लंबे समय से यह महसूस किया जा रहा था कि पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने की ज़रूरत है, खासकर आम नागरिकों के साथ बातचीत के तरीके में। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस का मुख्य उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ जनता के साथ मित्रवत संबंध स्थापित करना भी है। जब पुलिस का व्यवहार कठोर होता है, तो लोग उन पर भरोसा करने से हिचकते हैं, जिससे अपराध नियंत्रण और सूचना तंत्र भी प्रभावित होता है।
इसी पृष्ठभूमि में, दरभंगा पुलिस ने अब अपनी छवि सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग ने यह निर्देश जारी किया है कि पुलिसकर्मियों को आमजन के साथ शिष्ट और विनम्र व्यवहार करना होगा। ‘तू-तड़ाक’ के बजाय ‘आप’ का संबोधन और सम्मानजनक बातचीत पर ज़ोर दिया जाएगा।
कैसी होगी नई ‘पुलिस’?
इस पहल का उद्देश्य जनता और पुलिस के बीच विश्वास की खाई को पाटना है। जब पुलिसकर्मी सम्मानजनक तरीके से पेश आएंगे, तो लोग बिना किसी डर के अपनी समस्याएं साझा कर पाएंगे। इससे कई सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है:
- शिकायतों का बेहतर समाधान हो पाएगा।
- पुलिस को अपराध की रोकथाम और जांच में जनता का सक्रिय सहयोग मिल पाएगा।
- पुलिस की नकारात्मक छवि में सुधार आएगा।
- पुलिस वास्तव में ‘जनता के मित्र’ बन पाएगी।
यह देखना दिलचस्प होगा कि यह निर्देश कितनी गंभीरता से लागू होता है और इसका ज़मीनी असर क्या होता है। जनता को उम्मीद है कि यह केवल कागज़ों तक सीमित न रहकर एक स्थायी बदलाव लेकर आएगा, जिससे पुलिस के प्रति उनकी धारणा सकारात्मक बन सकेगी।



