Kusheshwar Asthan News: शिक्षा के मंदिर पर सियासत का ताला और खेल के मैदान पर मनमानी का भाला! कुशेश्वरस्थान में इन दिनों कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है, जहां स्कूल के खेल के मैदान पर बनाए जा रहे विवाह भवन को लेकर बवाल मचा हुआ है। शनिवार को स्थानीय लोगों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया और उन्होंने इस निर्माण के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
यह पूरा मामला कुशेश्वरस्थान पूर्वी स्थित उच्च विद्यालय के खेल मैदान से जुड़ा है। इसी परिसर में एक विवाह भवन का निर्माण किया जा रहा है, जिसके विरोध में शनिवार को नगर पंचायत के मुख्य पार्षद शत्रुघ्न पासवान की अध्यक्षता में एक अहम बैठक बुलाई गई। इस बैठक में कुशेश्वरस्थान बाजार और आसपास के गांवों के कई प्रबुद्ध नागरिक शामिल हुए। बैठक में सभी ने एक स्वर में स्कूल के मैदान में हो रहे इस निर्माण कार्य पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। लोगों ने साफ तौर पर कहा कि यह फैसला बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
Kusheshwar Asthan News: काली पट्टी बांधकर निकाला आक्रोश मार्च
बैठक के बाद मामला और गरमा गया जब मुख्य पार्षद शत्रुघ्न पासवान के नेतृत्व में लोगों ने अपनी बांहों पर काली पट्टी बांधी और विवाह भवन निर्माण के विरोध में एक बड़ा आक्रोश मार्च निकाला। यह मार्च बाजार के मुख्य मार्गों से होकर गुजरा, जिसमें प्रदर्शनकारी निर्माण कार्य को तत्काल बंद करने की मांग कर रहे थे। इस आक्रोश मार्च में ललितेश्वर पासवान, जयप्रकाश नारायण पासवान, ऋषि झा पंडा, कैयूम फारूकी, मोहम्मद मासूम, उपेन्द्र पासवान और जफर खान समेत कई अन्य प्रमुख लोग शामिल थे।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि खेल का मैदान छात्रों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए होता है, उसे व्यावसायिक गतिविधि का केंद्र नहीं बनने दिया जाएगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस तरह के अवैध विवाह भवन निर्माण से न केवल स्कूल का माहौल खराब होगा, बल्कि छात्रों को भी परेशानी होगी।
निर्माण नहीं रुका तो चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
मुख्य पार्षद और अन्य प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर इस विवाह भवन का निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से नहीं रोका गया तो वे चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनकी मांग है कि प्रशासन इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे और स्कूल की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे अपने बच्चों के अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले पर क्या रुख अपनाता है।


