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जनवरी, 5, 2026

Maithili Academy पर लगा ताला, दरभंगा की सड़कों पर उतरे साहित्यकार, सरकार से की ये बड़ी मांग

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Maithili Academy: जब भाषा की अस्मिता पर प्रशासनिक उदासीनता का ताला लग जाए, तो कलम के सिपाही सड़क पर उतरने को मजबूर हो जाते हैं। दरभंगा में शनिवार को कुछ ऐसा ही दृश्य दिखा, जहां मैथिली भाषा के गौरव को बचाने के लिए साहित्यकारों और समाजसेवियों ने जोरदार आवाज़ बुलंद की।

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क्यों बंद हुई Maithili Academy? जानिए पूरा मामला

दरभंगा में शनिवार को विद्यापति सेवा संस्थान के बैनर तले आयुक्त कार्यालय के सामने एक बड़ा धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य बिहार की एकमात्र संवैधानिक भाषा मैथिली के संरक्षण और संवर्धन के लिए बनी अकादमी को उसकी पुरानी स्वायत्तता वापस दिलाना था। प्रदर्शन की अध्यक्षता कर रहे प्रो. अयोध्या नाथ झा ने कहा कि यह लड़ाई मैथिली भाषा के सम्मान की है और इसे हर हाल में जीता जाएगा।

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प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए संस्थान के महासचिव डॉ. बैद्यनाथ चौधरी ‘बैजू’ ने अकादमी की स्थापना के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 1976 में इसकी स्थापना एक स्वतंत्र और स्वायत्त संस्था के रूप में हुई थी, जिसका काम भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति को बढ़ावा देना था। लेकिन आज प्रशासनिक लापरवाही के कारण इसके भवन पर ताला लटका है, जो पूरे मिथिला समाज के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की कमी और उन्हें दूसरे संस्थानों में भेजे जाने का बहाना बनाकर Maithili Academy को बंद करना मैथिली भाषा का अपमान है।

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अकादमी का गौरवशाली इतिहास और साहित्यिक योगदान

अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पंडित कमलाकांत झा ने इसके गौरवशाली अतीत को याद करते हुए बताया कि यह संस्था सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश में मैथिली शोध और प्रकाशन का एक बड़ा केंद्र रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अकादमी ने अब तक लगभग 213 महत्वपूर्ण पुस्तकों का प्रकाशन किया है, जिनमें से कई कृतियों को बड़े पुरस्कार भी मिले हैं।

  • अकादमी की 9 कृतियों को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिल चुका है।
  • इसकी प्रकाशित पुस्तकें UPSC और BPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी बेहद उपयोगी हैं।
  • देश के कई विश्वविद्यालयों में अकादमी की किताबें पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं।
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प्रदर्शन के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रमंडलीय आयुक्त हिमांशु कुमार राय से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। इस प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व प्रो. अयोध्या नाथ झा कर रहे थे। उन्होंने आयुक्त से सरकार तक इस मामले की गंभीरता को पहुंचाने का आग्रह किया। यह पूरा आंदोलन विद्यापति सेवा संस्थान की अगुवाई में किया गया था, जो मैथिली के उत्थान के लिए निरंतर कार्यरत है।

अब मुख्यमंत्री से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल

डॉ. बैजू ने जानकारी दी कि इस लड़ाई को अगले स्तर पर ले जाया जाएगा। रविवार को संस्थान का एक प्रतिनिधिमंडल डॉ. सी.पी. ठाकुर और मिथिला के अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा और अकादमी को फिर से शुरू करने की मांग रखेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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