प्रभाष रंजन, दरभंगा | जिला परिषद के उपाध्यक्ष और मुख्य कार्यपालक अधिकारी पर पिछले 11 महीनों में केवल एक बैठक आयोजित करने का आरोप लगा है, जबकि बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 की धारा 72 के तहत हर तीन महीने में बैठक करना अनिवार्य है। इस संबंध में पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष सह जिला परिषद सदस्य रेणु देवी ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता कर कई गंभीर आरोप लगाए।
क्या हैं मुख्य आरोप?
-
बैठकों का आयोजन न करना:
- Advertisement -🔥 आज की सबसे ज्यादा पढ़ी गई खबरें1
India US Sanctions अमेरिकी प्रतिबंधों से भारत को मिली छूट, क्या टला रूस से तेल खरीदने पर लगने वाला भारी शुल्क?2
ग्रेटर नोएडा में मैगी खाकर सोया परिवार- सुबह घर में मिली 5 लाशें!पति-पत्नी समेत तीन छोटे बच्चों की संदिग्ध मौत3
बिहार पुलिस की Digital Mapping बड़ा फैसला – थाना क्षेत्र विवाद का ‘अंत’! अब एक क्लिक में पता चलेगा कौन सा क्षेत्र, अपराधियों की खैर नहीं!4
भरूच में केमिकल फैक्ट्री ब्लास्ट: 5 की मौत, 6 घायल, 15 KM दूर तक गूंजा धमाका, दहशत में लोग!5
Bihar Festival Train दिवाली-छठ पर घर जाने की चिंता खत्म! रेलवे ने चलाईं स्पेशल ट्रेनें, जानिए पटना और बरौनी का पूरा शेड्यूल6
बिहार में सड़कों पर खर्च होंगे 1.64 लाख करोड़! दरभंगा-जयनगर समेत 32 नेशनल हाईवे परियोजनाओं को मिली हरी झंडी- नियम के विपरीत 11 महीनों में केवल एक बैठक की गई।
- पंचायत अधिनियम के उल्लंघन का मामला।
-
योजनाओं की खरीद-बिक्री और मनमानी:
- Advertisement -- आरोप है कि योजनाओं का चयन बैठक में पारित सूची से नहीं किया जा रहा।
- बिचौलियों के माध्यम से योजनाओं की खरीद-बिक्री हो रही है।
- मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी और अध्यक्ष नियमों को दरकिनार कर रहे हैं।
-
अस्थाई समिति का अवैध गठन:
- धारा 77 का उल्लंघन कर अध्यक्ष के अनुशंसा पर अस्थाई समिति का गठन।
- अधिनियम के अनुसार, स्थाई समितियों का गठन निर्वाचन द्वारा किया जाना चाहिए।
-
योजनाओं के भुगतान में 20% कमीशन की मांग:
- आरोप है कि जिला परिषद की योजनाओं में 20% कमीशन लिया जा रहा है।
- भुगतान के नाम पर जबरन ठेकेदारों से पैसे वसूले जा रहे हैं।
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष रेणु देवी ने इस संबंध में दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त और पंचायती राज विभाग, पटना के अपर मुख्य सचिव से शिकायत की थी। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्होंने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त 8 सप्ताह के भीतर इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करें।
आगे क्या?
अब सबकी नजरें प्रशासन की रिपोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों के आधार पर उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो जिला परिषद में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हो सकता है।







