प्रभाष रंजन, दरभंगा | जिला परिषद के उपाध्यक्ष और मुख्य कार्यपालक अधिकारी पर पिछले 11 महीनों में केवल एक बैठक आयोजित करने का आरोप लगा है, जबकि बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 की धारा 72 के तहत हर तीन महीने में बैठक करना अनिवार्य है। इस संबंध में पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष सह जिला परिषद सदस्य रेणु देवी ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता कर कई गंभीर आरोप लगाए।

क्या हैं मुख्य आरोप?
बैठकों का आयोजन न करना:
- Advertisement -🔥 आज की सबसे ज्यादा पढ़ी गई खबरें1
बड़ी खबर! उत्तर बिहार से दिल्ली जाने वाली इन ट्रेनों का परिचालन 2026 तक बढ़ा, देखें पूरी लिस्ट2
बिहार में शिक्षक बनना अब और मुश्किल! BPSC TRE-4 में 33 हजार पदों पर 10 लाख से ज्यादा आवेदन, देखें पूरा गणित3
Bihar Politics लालू परिवार में बगावत! तेज प्रताप ने ‘चरवाहा विद्यालय’ से साधा CM Samrat पर निशाना, खोली अंदरूनी कलह की पोल!4
सेना में अग्निवीरों की चांदी! अब 2 साल और कर पाएंगे देश सेवा, CDS का बड़ा ऐलान5
IND vs NZ न्यूजीलैंड वनडे में टीम इंडिया की ‘शुभ’ शुरुआत | भारत ने 5 विकेट से धोया! कोहली का तूफान, अर्शदीप का कहर6
अमेरिका में बड़ा उलटफेर: ट्रंप की पार्टी को लगा तगड़ा झटका, कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स का कब्जा! | पढ़िए – क्या क्या डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देंगे?- नियम के विपरीत 11 महीनों में केवल एक बैठक की गई।
- पंचायत अधिनियम के उल्लंघन का मामला।
योजनाओं की खरीद-बिक्री और मनमानी:
- Advertisement -- आरोप है कि योजनाओं का चयन बैठक में पारित सूची से नहीं किया जा रहा।
- बिचौलियों के माध्यम से योजनाओं की खरीद-बिक्री हो रही है।
- मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी और अध्यक्ष नियमों को दरकिनार कर रहे हैं।
अस्थाई समिति का अवैध गठन:
- धारा 77 का उल्लंघन कर अध्यक्ष के अनुशंसा पर अस्थाई समिति का गठन।
- अधिनियम के अनुसार, स्थाई समितियों का गठन निर्वाचन द्वारा किया जाना चाहिए।
योजनाओं के भुगतान में 20% कमीशन की मांग:
- आरोप है कि जिला परिषद की योजनाओं में 20% कमीशन लिया जा रहा है।
- भुगतान के नाम पर जबरन ठेकेदारों से पैसे वसूले जा रहे हैं।
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष रेणु देवी ने इस संबंध में दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त और पंचायती राज विभाग, पटना के अपर मुख्य सचिव से शिकायत की थी। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्होंने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त 8 सप्ताह के भीतर इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करें।
आगे क्या?
अब सबकी नजरें प्रशासन की रिपोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों के आधार पर उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो जिला परिषद में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हो सकता है।







