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Darbhanga में राष्ट्रीय सेमिनार का शानदार समापन, भारतीय चिंतन और सतत विकास पर मंथन

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National Seminar: पांच दिनों तक चले ज्ञान के महाकुंभ का आखिरकार समापन हो गया है। विश्वविद्यालय परिसर में हुए इस कार्यक्रम में देश-विदेश से आए विद्वानों ने भारतीय चिंतन की गहराई और आधुनिक व्यावसायिक चुनौतियों पर खुलकर चर्चा की। इस दौरान सतत विकास और शोध के महत्व को भी रेखांकित किया गया।

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22 अप्रैल को शुरू हुए पांच दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य समापन रविवार को विश्वविद्यालय के जुबली हॉल में हुआ। इस समापन सत्र में झारखंड केन्द्रीय विश्वविद्यालय, रांची के पूर्व कुलपति प्रोफेसर एन. के. यादव इंदु मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रशासन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. बी. बी. इल. दास ने आशीर्वादात्मक उद्बोधन दिया। सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर एस. के. चौधरी ने की।

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राष्ट्रीय सेमिनार: विचार-विमर्श और निष्कर्ष

मुख्य अतिथि प्रोफेसर इंदु ने अपने संबोधन में भारतीय चिंतन की अद्वितीय श्रेष्ठता और पाश्चात्य दर्शन से इसकी भिन्नता पर प्रकाश डाला। उन्होंने धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे चार पुरुषार्थों की विस्तार से व्याख्या करते हुए ‘शुभ लाभ’ की अवधारणा के साथ व्यावसायिक चिंतन को जोड़ने की बात कही। वहीं, प्रोफेसर दास ने शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे सतत विकास की अवधारणा को अपनाकर पर्यावरण हितैषी नवाचारों पर काम करें। उन्होंने ‘बहुजन हिताय बहुजन सुखाय’ के प्राचीन मंत्र को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

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अध्यक्षीय उद्बोधन और भावी दिशा

अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर एस. के. चौधरी ने भारतीय जीवन मूल्यों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने शोध एवं प्रकाशन के प्रति छात्रों और शिक्षकों दोनों में उत्कंठा जगाने और लक्षित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करने पर जोर दिया। उनका मानना था कि देश की बेहतरी और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह एक अनिवार्य शर्त है।

समापन समारोह की मुख्य बातें

सत्र की शुरुआत में सम्मेलन के सचिव डॉक्टर राज कुमार शाह ने आए हुए अतिथियों का प्रतीक चिन्ह देकर स्वागत किया, जबकि संरक्षक प्रोफेसर एच. के. सिंह ने स्वागत भाषण दिया। विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिभागियों ने अपने शोध और अनुभव साझा किए। प्रतिवेदकों के प्रतिवेदन को डॉक्टर ललित शर्मा ने प्रस्तुत किया। कुलपति ने भविष्य में भी इस तरह की अकादमिक गतिविधियों को जारी रखने का निर्देश देते हुए सत्र का समापन किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। सम्मेलन के समन्वयक डॉक्टर दिवाकर झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया और डॉक्टर निर्मला कुशवाह ने कुशलतापूर्वक मंच संचालन किया।

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