
बिरौल, दरभंगा न्यूज़: बिहार के दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक तरफ जहां सरकार बेहतर शिक्षा व्यवस्था और पर्याप्त आधारभूत संरचना का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर यहां एक विद्यालय में सुविधाओं की कोई कमी न होने के बावजूद बच्चों को पूरी पढ़ाई नहीं मिल पा रही है। आखिर किस आधार पर, और किसके आदेश पर, इस स्कूल को दो पालियों में चलाया जा रहा है, इसे लेकर ग्रामीणों ने अब मोर्चा खोल दिया है।
बिरौल प्रखंड के पटनिया गांव में स्थित मध्य विद्यालय पटनिया की पुरानी समय-सारिणी बहाल करने और रामनगर पंचायत के रामपुर टोला स्कूल को उसी परिसर में संचालित करने की मांग को लेकर स्थानीय अभिभावकों और ग्रामवासियों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) से लिखित शिकायत की है। शिकायतकर्ताओं, जिनमें अजय झा, संजय शर्मा, युगेश्वर झा और गुड्डी देवी जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं, का कहना है कि विद्यालय में पर्याप्त आधारभूत संरचना उपलब्ध है, फिर भी इसे दो पालियों में चलाया जा रहा है, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, मध्य विद्यालय पटनिया का अपना विशाल भवन है, जिसमें निम्नलिखित सुविधाएं मौजूद हैं:
- कुल 30 कक्षाएँ
- 14 शौचालय
- 6 सीढ़ियाँ
इसके अलावा, उच्च माध्यमिक विद्यालय के पास भी अपना अलग से 8 कमरे और 8 शौचालय हैं। ऐसे में, सुविधाओं की कमी का हवाला देकर दो पालियों में स्कूल चलाने का कोई औचित्य नहीं दिखता।
विद्यालय में सुविधाएं भरपूर, फिर भी क्यों दो पालियों में संचालन?
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि डीईओ के पत्र क्रमांक 4071, दिनांक 16 अक्टूबर 2025 के आलोक में विद्यालय प्रधान ने ‘आधारभूत संरचना की कमी’ का तर्क देते हुए दो पाली में विद्यालय संचालन का आदेश जारी किया है। हालांकि, ग्रामीणों का स्पष्ट मानना है कि विद्यालय में पर्याप्त सुविधाएँ मौजूद हैं और यह तर्क निराधार है। उनका आरोप है कि इस नई व्यवस्था के तहत बच्चों को दो-तीन घंटी की पढ़ाई के बाद 10:30 बजे लंच दे दिया जाता है और फिर 8 से 9 बजे से शुरू हुई पढ़ाई के बाद 11:15 बजे तक ही छुट्टी दे दी जाती है।
कम घंटों की पढ़ाई से छात्रों का भविष्य खतरे में
ग्रामीणों का कहना है कि यह व्यवस्था छात्रों के लिए बेहद असुविधाजनक है और इससे उनकी पढ़ाई का गंभीर नुकसान हो रहा है। कम समय में पाठ्यक्रम पूरा करना मुश्किल हो रहा है, जिससे बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। अभिभावकों ने यह भी मांग की है कि विद्यालय को उसी पंचायत में स्थानांतरित किया जाना चाहिए ताकि छात्रों को आने-जाने में कोई दिक्कत न हो और उन्हें पूरी अवधि तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
दूसरे स्कूल के संचालन पर भी सवाल
यह मामला केवल मध्य विद्यालय पटनिया तक ही सीमित नहीं है। रामनगर पंचायत के रामपुर टोला स्थित मध्य विद्यालय पटनिया के प्रांगण में भी इसी प्रकार की अनियमितता की शिकायत की गई है। ग्रामीणों ने दोनों मामलों की गहन और निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है। उनकी प्रमुख मांग है कि सभी विद्यालयों में पूर्ववत समय-सारिणी बहाल की जाए और छात्रों के हित में आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएँ।
शिक्षा विभाग ने दिया जांच का आश्वासन
इस पूरे प्रकरण पर बिरौल के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) कुंदन कुमार ने संज्ञान लिया है। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि मामले की विस्तृत जांच की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित एवं आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों को उम्मीद है कि शिक्षा विभाग उनकी शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान देगा और जल्द ही पुरानी व्यवस्था को बहाल कर छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करेगा।





