
Sanskrit Education: दरभंगा देशज टाइम्स। ज्ञान और संस्कृति की वह दिव्य धारा, जो कभी मिथिला की पहचान थी, अब नए युग के साथ रोजगार के नूतन क्षितिज खोल रही है। केंद्र सरकार की पहल और जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से इस प्राचीन विद्या के गौरव को पुनर्जीवित करने का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।
Sanskrit Education का पुनरुत्थान: लगमा आदर्श संस्कृत महाविद्यालय को मिलेगी नई पहचान, खुलेंगे रोजगार के द्वार
Sanskrit Education: रोजगार के नए अवसर और अकादमिक उत्थान
मिथिला, भारत की ज्ञान परंपरा का सदियों से ऐतिहासिक केंद्र बिंदु रहा है। यहां के मनीषियों ने शिक्षा, संस्कार, न्याय दर्शन, वेद और मीमांसा जैसे गूढ़ विषयों में न केवल देश बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी श्रेष्ठता स्थापित की है। हालांकि, पाश्चात्य संस्कृति और भौतिकवाद के बढ़ते प्रभाव ने संस्कृत विद्या तथा संस्कृत विषय से शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या में निरंतर कमी ला दी थी। लेकिन, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लागू की गई नई शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से संस्कृत विद्या को रोजगार से जोड़ने की पहल ने इस दिशा में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब संस्कृत विषय के माध्यम से रोजगारपरक संभावनाओं का विस्तार हो रहा है और छात्रों में शिक्षा तथा शोध के प्रति पुनः जागरूकता बढ़ रही है।
भारत सरकार से संबद्ध लगमा आदर्श संस्कृत महाविद्यालय की पठन-पाठन व्यवस्था से लेकर अन्य सभी लंबित मुद्दों का शीघ्र समाधान किया जाएगा। यह जानकारी स्थानीय सांसद सह लोकसभा में भाजपा सचेतक डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने दी। उन्होंने शनिवार देर शाम डॉ. कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. लक्ष्मीनिवास त्रिपाठी के साथ महाविद्यालय का जायजा लेने के बाद यह बात कही। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. निरंजन मिश्र द्वारा सांसद डॉ. ठाकुर को पाग और अंगवस्त्र से सम्मानित किया गया। स्थानीय समाजसेवी कृष्ण कुमार चौधरी सहित महाविद्यालय के प्राचार्य, प्राध्यापकों तथा शिक्षकेतर कर्मचारियों ने सांसद का ध्यान महाविद्यालय से संबंधित विभिन्न विषयों पर आकृष्ट कराया।
इन मुद्दों पर चर्चा करते हुए सांसद डॉ. ठाकुर ने महाविद्यालय की पठन-पाठन व्यवस्था को दुरुस्त करने सहित सभी समस्याओं पर शीघ्र पहल का आश्वासन दिया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
जगदीश नारायण ब्रह्मचर्य आश्रम की गरिमा बहाली पर जोर
चर्चा के दौरान सांसद डॉ. ठाकुर ने जगदीश नारायण ब्रह्मचर्य आश्रम आदर्श संस्कृत महाविद्यालय की महत्ता को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1964 में स्थापित यह संस्थान केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से संचालित है तथा इसमें उप-शास्त्री से लेकर आचार्य तक की पढ़ाई और शोध की मान्यता है। इस संस्थान में 12 शिक्षकों के साथ 7 शिक्षकेतर कर्मचारियों के पद भारत सरकार से स्वीकृत हैं। लेकिन अतिथि शिक्षकों के अधिकांश पदों के रिक्त होने और अन्य सभी खाली पदों पर नियुक्ति के साथ-साथ इसकी आधारभूत संरचना, छात्रावास आदि के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर यथाशीघ्र पहल शुरू कर दिए जाएंगे, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सांसद डॉ. ठाकुर ने इस आदर्श संस्कृत महाविद्यालय की प्राचीन गरिमा पर चर्चा करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में इस महाविद्यालय की महती भूमिका रही है। इस मौके पर सांसद डॉ. ठाकुर ने संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. लक्ष्मीनिवास त्रिपाठी, प्राचार्य प्रो. निरंजन मिश्र तथा स्थानीय समाजसेवियों से इस महाविद्यालय के समग्र उत्थान के लिए अनेक मुद्दों पर गहन चर्चा की। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प तथा बौद्धिक पुनर्जागरण का स्पष्ट संदेश है, जिससे दरभंगा तथा मिथिला के शिक्षण संस्थानों को जोड़ने की नितांत आवश्यकता है।


