
बिहारवासियों समेत दरभंगावासियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने जिन चार शहरों में रिंग रोड बनाने के बिहार सरकार के प्रस्ताव को हरी झंडी दी है उनमें दरभंगा भी शामिल (Ring road will soon be built in Darbhanga) है। केंद्र की सहमति के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।
बिहार सरकार ने भागलपुर, गया, दरभंगा और मुजफ्फरपुर में रिंग रोड बनाने का प्रस्ताव केंद्र के समक्ष रखा था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। इन चारों शहरों में रिंग रोड बनने से काफी हद तक जाम से मुक्ति मिलने की उम्मीद है। दरभंगा में वाहनों के दबाव और जाम की स्थिति को देखते हुए रिंग रोड निर्माण की मंजूरी मिली है। इससे आमलोगों को काफी सुविधा होगी।
जानकारी के अनुसार, बिहार में रिंग रोड के निर्माण को लेकर पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने केन्द्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से उनके नई दिल्ली के अकबर रोड स्थित आवास पर मुलाकात की। नितिन नवीन बिहार के 4 शहरों में रिंग रोड निर्माण का प्रस्ताव लेकर नितिन गडकरी के पास गए थे नितिन गडकरी ने उनके प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है।
जानकारी के अनुसार, दरभंगा में जल्द रिंग रोड का निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। केंद्र सरकार की सहमति के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बाद रिंग रोड का डीपीआर तैयार होगा।
दरभंगा में वर्तमान में ट्रैफिक जाम की समस्या के कारण आम नागरिकों को आए दिन काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दरभंगा में रिंग रोड की उपयोगिता, ऐतिहासिक महत्व, पर्यटकीय दृष्टिकोण के अलावा बढ़ते ट्रैफिक दबाव और लोगों को सुविधा युक्त सफर के उद्देश्य से रिंग रोड बनाना अति आवश्यक था। इसको लेकर सांसद गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि दरभंगा में रिंग रोड बन जाने से कम समय में लोग अधिक दूरी तय कर सकेंगे एवं शहरों पर यातायात का भार कम होगा जिससे शहर में जाम की समस्या भी कम होगी।
संसद श्री ठाकुर ने कहा कि दरभंगा बिहार के प्राचीनतम शहरों में से एक है और राज्य का 5वां सबसे बड़ा शहर है। इसे बिहार की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है। उत्तर बिहार में दरभंगा एकमात्र ऐसा शहर है, जहां व्यवसायिक एयरपोर्ट की सुविधा उपलब्ध है और आने वाले दिनों में एम्स, तारामंडल, आईटी पार्क, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल सहित कई परियोजना पूर्ण हो जाने से लोगों का आवागमन और बढ़ेगा। जिस कारण शहर पर वाहनों का दबाव काफी अधिक होगा। इससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता था, इस समस्या को देखते हुए यहां रिंग रोड का निर्माण अति आवश्यक हो गया था।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के भारत माला परियोजना के तहत मिथिला में नेशनल हाइवे सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार में 7000 करोड़ की लागत से बन रहे बिहार के पहले एक्सप्रेस वे सड़क का सौगात भी आमस-दरभंगा के जरिए दरभंगा को दिया गया। उन्होंने ने कहा कि एम्स को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करने हेतु कर्पूरी चौक से पूर्व दिशा की ओर लगभग तीन किलोमीटर लंबे फॉर लेन फ्लाई ओवर सड़क, जो एम्स को सीधे आमस – दरभंगा एक्सप्रेस वे से जोड़ेगा, के निर्माण को लेकर भी वह सक्रिय है, ताकि एम्स आने वाले मरीज को कोई दिक्कत ना हो।
सांसद श्री ठाकुर ने कहा वर्तमान लहेरियासराय से रोसड़ा पथ को भी एनएच सड़क में परिवर्तित करने का स्वीकृति मिल चुका है। यह सड़क अब एनएच 527E के नाम से जानी जाएगी और इस सड़क का निर्माण लगभग 500 करोड़ रूपए से होगा। उन्होंने ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से भारत माला धार्मिक संपर्क योजना के तहत उमगांव (उच्चैठ भगवती) से महिषी (तारास्थान) तक बनने वाली सड़क की बजटीय स्वीकृति दे दिया है। इस परियोजना का कुल लागत लगभग तीन हजार करोड़ रूपए है।
भारतमाला परियोजना के तहत राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग सड़कों का जाल बिछाया जाएगा, जिससे मिथिला सहित बिहार के तमाम जिलों में बेहतर कनेक्टिविटी की सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा की बिहार में इस परियोजना की शुरुआती लागत 50- 60 हजार करोड़ रुपए होगा। इसके तहत भारत-नेपाल बॉर्डर सड़क (552 किमी) को फोरलेन में परिवर्तित करने सहित राज्य के कई सड़क शामिल हैं।
वह दरभंगा सहित मिथिला में एनएच एवं एनएचएआई सड़कों के अधिक से अधिक निर्माण हेतु प्रारंभ से ही प्रयासरत रहे हैं और इसको लेकर कई बार केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी जी से मुलाकात कर विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा एवं मांग भी कर चुके हैं।
दरभंगा सहित मिथिला में एनएच एवं एनएचएआई की कई परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान करने के लिए देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी जी सहित बिहार के पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन जी को आठ करोड़ मिथिलावासियों की ओर से धन्यवाद दिया।


