

Sanskrit University Election: ज्ञान की तपस्थली में अब लोकतंत्र का शंखनाद गूंजेगा, 43 वर्षों का लंबा इंतजार अब खत्म होने को है। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में चार दशक बाद सीनेट सदस्यों के चुनाव का बिगुल बज चुका है, जिससे विश्वविद्यालय परिसर से लेकर सम्बद्ध कॉलेजों तक चुनावी हलचल तेज हो गई है।
Sanskrit University Election: चुनाव के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन
दरभंगा स्थित संस्कृत विश्वविद्यालय लगभग 43 वर्षों के बाद एक नया इतिहास रचने की दहलीज पर है। विश्वविद्यालय में शिक्षक संवर्ग और कॉलेजों के शासी निकाय के प्रतिनिधियों के लिए सीनेट सदस्यों का चुनाव 2026 में होना प्रस्तावित है। इससे पहले यह चुनाव वर्ष 1982 में हुआ था। इस महत्वपूर्ण चुनाव प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी के संयोजक की जिम्मेदारी व्याकरण विभाग के पूर्व अध्यक्ष और अनुभवी पूर्व कुलसचिव प्रो. सुरेश्वर झा को सौंपी गई है। उनके साथ सिंडिकेट सदस्य प्रो. अजित कुमार चौधरी एवं सीनेट सदस्य अंजीत कुमार चौधरी को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विश्वविद्यालय के पीआरओ निशिकांत ने जानकारी देते हुए बताया कि कमेटी ने अपनी पहली बैठक कुलसचिव कार्यालय में आयोजित की। इस बैठक में चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस खबर के फैलते ही विश्वविद्यालय मुख्यालय और सम्बद्ध कॉलेजों में शिक्षकों के बीच चुनावी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कई शिक्षक फोन के माध्यम से मुख्यालय से जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।
मतदाता सूची होगी तैयार, 6 फरवरी को अगली बैठक
लगभग 20 सीनेट सदस्यों के लिए होने वाले इस चुनाव की पहली बैठक में सबसे पहले मतदाता सूची का प्रारूप तैयार कराने पर सहमति बनी। इसके साथ ही, चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक कर्मियों और उपकरणों की व्यवस्था पर भी विचार-विमर्श किया गया। कमेटी की अगली बैठक 6 फरवरी को निर्धारित की गई है, जिसमें मतदान की बाकी प्रक्रियाओं, तिथि और समय के निर्धारण पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस चुनाव से विश्वविद्यालय के सिंडिकेट और सीनेट में शिक्षकों का प्रतिनिधित्व मजबूत होगा, जिससे उनके हितों की आवाज और बुलंद होगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
शिक्षकों और शासी निकायों के प्रतिनिधियों का होगा निर्वाचन
कुलसचिव प्रो. ब्रजेशपति त्रिपाठी ने सीटों के बंटवारे की जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षक संवर्ग से कुल 13 सदस्यों का चुनाव होना है। इसमें अनुसूचित जाति-जनजाति (SC-ST) कोटे से दो-दो, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से तीन और सामान्य श्रेणी से आठ सदस्यों का निर्वाचन किया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसी प्रकार, कॉलेजों के शासी निकायों के प्रतिनिधियों में से लगभग पांच सदस्यों का चुनाव होगा।
विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार, अंगीभूत और शास्त्री स्तर के सम्बद्ध कॉलेजों में न्यूनतम पांच वर्षों का शैक्षणिक अनुभव रखने वाले शिक्षक ही मतदाता बनने और उम्मीदवार के रूप में खड़े होने के पात्र होंगे। चुनाव के लिए सभी कॉलेजों में मतदान केंद्र बनाए जाने समेत अन्य आवश्यक बिंदुओं पर अगली बैठक में विचार किया जाएगा। जानकारों का मानना है कि इस चुनाव के बाद विश्वविद्यालय की अकादमिक और प्रशासनिक गतिविधियों में शिक्षक प्रतिनिधियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।

