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Darbhanga के जाले में Sitamarhi के किसानों को वैज्ञानिकों ने दिए जलवायु अनुकूल खेती के टिप्स

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जाले, देशज टाइम्स। कृषि विज्ञान केंद्र जाले में कार्यशाला आयोजित किया गया। इसमें सीतामढ़ी जिला के विभिन्न प्रखंड से आए किसानों को जलवायु अनुकूल खेती का प्रशिक्षण देकर खेत का वैज्ञानिकों ने परिभ्रमण कराया।

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इस दौरान जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के अंतर्गत सीतामढ़ी के कृषकों को प्रशिक्षित किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र जाले में सीतामढ़ी के विभिन्न प्रखंडों  से आए पचास कृषकों को मंगलवार को सरकार की ओर से चल रही जलवायु अनुकूल कृषि कार्य को लेकर आयोजित कार्यशाला में प्रशिक्षित किया गया।

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कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष सह वरीय वैज्ञानिक डॉ.दिव्यांशु शेखर ने सभी किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि इस परिभ्रमण कार्यक्रम के माध्यम से किसान यह देख रहे है कि दरभंगा जिला के किसान किस प्रकार जलवायु अनुकूल कृषि तकनीक को अपनाकर बदलते मौसम के परिवेश में भी खेती कर रहे हैं।

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उन्होंने किसानों को बताया कि फसल प्रबंध का चयन मिट्टी एवं जमीन के प्रकार के अनुसार करें, फसल की बुवाई मशीनों के द्वारा करें, फसलों में सिंचाई के लिए सूक्ष्म सिंचाई तकनीक को अपनाने को कहा।

उन्होंने गेहूं की बुवाई जीरो टिलेज मशीन से करने को कहा,आगे बताया कि इससे किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा हो सकता है। डॉ.अंजली सुधाकर ने विभिन्न फसलों में उपयोग होने वाले विभिन्न यंत्रों के बारे में किसानों को जानकारी दी।

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प्रक्षेत्र प्रबंधक डॉ.चंदन कुमार एवम कार्यक्रम सहायक डॉ. संदीप सुमन ने सभी किसानों को केंद्र में जलवायु अनुकूल खेती अंतर्गत लगे धान के विभिन्न प्रभेदों, एवं बुआई तकनीक को दिखाया।

कार्यक्रम में उपस्थित कृषि विज्ञान केंद्र सीतामढ़ी के कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ रणधीर कुमार, नन्दन कुमार, वरिय  शोध सहायक समेत सभी कृषकों को कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा जलवायु अनुकूल कृषि अंतर्गत चयनित ग्राम रतनपुर ब्रह्मपुर एवं सनहपुर का परिभ्रमण करवाया गया।

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रतनपुर गांव के किसान निरंजन ठाकुर ने सीतामढ़ी से आए किसानों को बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र जाले के सुझाव से उन्होंने धान की सीधी बुवाई विधि को अपनाया। और, पिछले तीन सालों से वह साल भर में तीन फसल एक खेत में लगा पा रहे हैं।

किसानों ने ब्रह्मपुर ग्राम में सामुदायिक सिंचाई के प्रत्यक्षण को भी देखा। किसानों को सनहपुर ग्राम में पान और उन्नत सब्जियों की खेती का भी परिभ्रमण करवाया जिससे किसान धान और गेहूं के अलावा अन्य फसल लगाने के लिए भी प्रेरित हो।

किसानों ने परिभ्रमण की प्रशंसा करते थे कहां की इस परिभ्रमण के माध्यम से उन्हें कृषि कार्य का सर्वोत्तम ज्ञान सीखने को मिली।

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