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दरभंगा की Singhwara पुलिस के चेहरे पर दाग हो गए जांच में साफ… Singhwara पुलिस ने नहीं की नाइंसाफी…हो गया पर्दाफाश

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संजय कुमार राय, दरभंगा देशज टाइम्स अपराध ब्यूरो। सिंहवाड़ा थाना पुलिस पर एक सप्ताह पूर्व कई गंभीर आरोप लगे। इस गंभीर आरोपों की जांच की गई। कई स्तरों पर जांच हुई। क्योंकि मामला सीधा सिंहवाड़ा थाना की अस्मिता से जुड़ा था लिहाजा इसकी जांच हर स्तर पर की गई। क्योंकि मामला भूमि विवाद से जुड़ा होने और इसकी संवेदनशीलता को देखते इसकी जांच हर स्तर पर लाजिमी था। लिहाजा जांच हुई और फिर मामले का पर्दाफाश हो गया।

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हर स्तर पर हुई जांच में सिंहवाड़ा पुलिस का चेहरा साफ-सुथरा दिखने से तय हो गया कि आरोप लगाने के पीछे मंशा कुछ और था जिसका परत दर परत खुलासा हो जाने से अब सिंहवाड़ा पुलिस यह दमदार तरीके से कह सकती है कि उसने कहीं कोई नाइंसाफी नहीं की। पढ़िए पूरी पड़ताल करती रपट…

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थाना क्षेत्र के भगवतीपुर गांव निवासी सुरेन्द्र शर्मा की पत्नी सुनैना देवी ने एसएसपी अवकाश कुमार को पत्र देकर सिंहवाड़ा पुलिस पर घर तोड़ने और सीसीटीवी फुटेज के सामने घुस लेने का आरोप लगाया। काफी हाय-तौबा मचाई। इसके बाद इस मामले की जांच इंस्पेक्टर योगेन्द्र रविदास को दी गई।

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इंस्पेक्टर योगेन्द्र दास ने इसकी निष्पक्ष जांच करते हुये एसएसपी अवकाश कुमार को प्रतिवेदन सौंप दिया हैं। इस प्रकरण में सबसे मजेदार पहलू यह है कि उल्टे सुनैना देवी एवं उसके परिजनों ने शकरपुर गांव निवासी मो. इस्लाम के बने फूस के घर को जबरन कब्जा कर अपना जमीन बताया गया था,जबकि जांच में साफ हो गया कि यह जमीन उनकी थी ही नहीं या है।

स्थानीय कई दर्जन लोगों से इस मामले में पूछताछ करने पर पता चला कि सुनैना देवी के तीन पुत्र हैं, जो आपराधिक प्रवृत्ति के हैं। लोगों का कहना है कि सुनैना देवी के सभी पुत्र आर्म्स एक्ट, पेट्रोल पंप लूट कांड एवं शराब बेचने के आरोप में जेल गये हुये हैं।

इस कारण वहां कई लोगों में भय व्याप्त रहता हैं। स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि ये लोग मो. इस्लाम की जमीन को कब्जा कर अफवाहों का बाजार गर्म कर दिया कि उसकी जमीन नहीं हैं। लोगों का कहना था कि ये लोग हिंदू- मुस्लिम एकता को खत्म कर समाज में नफरत फैलाने के प्रयास में थे, ताकि माहौल बिगड़े। लेकिन, ऐन वक्त पर पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई से सुैनाना देवी के पोल खुल गये और झूठा आरोप पुलिस पर मढ़ दिया।

इधर, इंस्पेक्टर योगेन्द्र रविदास ने भी जांचोपरांत जो प्रतिवेदन एसएसपी अवकाश कुमार को दिये हैं, उसमें स्पष्ट है कि सुनैना देवी से जब जमीन के कागजातों की मांग की गई तो उनकी ओर से कोई जमीन संबंधी कागजात उपलब्ध नहीं कराए गए।

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इंस्पेक्टर ने सुनैना देवी के पुत्र प्रहलाद से जमीन के कई बार कागजातों की मांग की। पर, कोई कागजात उसने नहीं दिया। वहीं, द्वितीय पक्ष ने जमीन संबंधी सभी कागजातों को दिखाया।

जांच में यह बात भी सामने आई कि सुनैना देवी अपनी जमीन पर काबिज हैं और दुकान चला रही हैं। और, व्यवधान डालने के लिये मो. इस्लाम के विरुद्ध आवेदन देती रहती हैं।

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जांच प्रतिवेदन में यह भी स्पष्ट हैं कि सीसीटीवी फुटेज में कोई भी पुलिसकर्मी कोई घूस, रिश्वत नहीं लिया हैं। यह आरोप निराधार हैं। सीओ की नापी से भी स्पष्ट है कि मो. इस्लाम की वह जमीन है। उक्त महिला ने सीओ को भी आवेदन दिया था, लेकिन सीओ ने भी कहा कि आवेदन कर्ता का आरोप गलत हैं।

दरअसल, खाता संख्या 116 में 21 डिसमिल जमीन हैं। इसमें सात डिसमिल जमीन हैं जो मो.इस्लाम के नाम से हैं।सुनैना देवी की रजिस्ट्री से बहुत पहले मो. इस्लाम ने रजिस्ट्री कराई थी, जिसका सभी कागजात उसके नाम से हैं।

इधर चर्चा हैं कि जब इस्लाम ने थाना पर आवेदन देकर थानाध्यक्ष से गुहार लगाई कि मेरी जमीन को अपराधियों और उनकी मां की ओर से कब्जा कर लिया गया हैं। उधर, सुनैना के परिजनों ने भी थाना में आवेदन दिया तो थानाध्यक्ष मनीष कुमार खुद जमीन पर जांच करने पहुंच गये। ताकि हिंदू-मुस्लिम का मामला ना बन जाए।

जब जांच में पहुंचे तो वहां इस्लाम की झोपड़ी को कब्जा कर सीसीटीवी लगा दिया गया था ताकि कोई प्लॉट पर आये तो सीसीटीवी फुटेज में कैद हो जाय।

बस क्या था। निरीक्षण करने पहुंचे थानाध्यक्ष मनीष कुमार का सीसीटीवी फुटेज निकालकर थानाध्यक्ष मनीष कुमार पर ही आरोप लगाते हुये वीडियो को वायरल करने के प्रयास में सभी जुट गए।

वहीं, दूसरी ओर उक्त जगह पर मोटरसाइकिल की चेकिंग कराई जा रही थी। उक्त शातिरों ने पुअनि अशोक कुमार सिंह पर पैसा लेने का आरोप लगा दिया गया। जांचकर्ता जब एसएसपी के आदेश पर सीसीटीवी फुटेज की जांच में जुटे तो दोनों आरोप गलत पाएं गये।

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एक पीड़ित महिला जब किसी मामले को लेकर थाना या अन्य कार्यालय पहुंचती हैं तो पदाधिकारी सम्मानजनक तरीके से उनकी बातों को सुनते हैं और कार्रवाई का आदेश देते हैं। लेकिन, महिला की ओर से झूठा आरोप प्रत्यारोप का खेल खेला जाय तो पदाधिकारियों का विश्वास टूटता हैं। सुरेन्द्र शर्मा और उनके बेटों ने अपनी मां-पत्नी को ही इस प्रकरण में आगे कर मोहरा बनाया।

इधर, मो. इस्लाम ने वहां घर बनाने के लिये एक ट्रक बालू, दो ट्रैलर गिट्टी, करीब पचास हजार का लोहा एवं छह ट्रैलर ईंट गिराया था। इसकी कुल कीमत दो लाख के करीब हैं।

मो. इस्लाम का आरोप हैं कि उसके मकान के सामानों से सुनैना देवी ने घर बना लिया और उसका सामान भी सुनैना के घर में हैं। इस्लाम कहते हैं कि पुलिस को चाहिये कि उसकी चोरी गये सभी सामानों को पुलिस बरामद कर दे लेकिन पुलिस ऐसा नहीं कर रही हैं।

इधर, इस बाबत थानाध्यक्ष मनीष कुमार से पूछने का प्रयास किया तो उनका कहना है कि हम कोई भी काम वरीय पुलिस अधिकारियों के आदेश के बाद ही करेंगे। अब सवाल उठता है कि मो. इस्लाम का गृह निर्माण से संबंधित जिन सामानों की चोरी हुई हैं, वह बरामद तो पुलिस ही कराएगी? पुलिस का इस प्रकरण से पल्ला झाड़ना नियम विरुद्ध लगता हैं।

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