

उत्तम सेन गुप्ता, बिरौल देशज टाइम्स डिजिटल डेस्क। पांच वर्ष बितने को हैं बावजूद अंचल प्रशासन अपने भूमि को अवैध कब्जा से मुक्त कराने में असर्मथ दिख रही है। ऐसे में लोगों को अंचल प्रशासन के इस कार्य प्रणाली से विश्वास उठता जा रहा है। यही वजह है कि इस मामले को ग्रामीणों ने लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के टेबल तक पहुंचा दिया है।
उक्त भूमि पर कुछ लोगों ने वर्षों से अवैध कब्जा कर रखा है। इसकी लिखित सूचना ग्रामीणों ने अंचल कार्यालय को कई बार दिया गया है। बावजूद पांच वर्ष पूरे हो रहे हैं, लेकिन अंचल प्रशासन ने अपनी ही भूमि को अवैध कब्जा से मुक्त नहीं करा पाई है।
इस संबंध में राजस्व कर्मचारी भोला यादव का कहना है कि यह मामला इनके संज्ञान में नहीं है। वहीं, अंचल अमीन अमरेश कुमार ने बताया कि अंचलाधिकारी के निर्देश पर खेसरा संख्या 60 का नापी किया गया है।
इसमें 11 डिसमिल भूमि पर लोगों का अवैध कब्जा है। जिसे चिन्हित करने के बाद वादी- प्रतिवादी को बता दिया गया है। उन्होंने बताया कि उक्त भूमि से संबंधित नापी प्रतिवेदन कार्यालय को भेजा जा रहा है।
इधर रामसोगारत मुखिया, संजीत, अमरजीत,लालटुन ठाकुर, अरूण साफी,चन्द्र शेखर यादव सहित दर्जनों ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले को लेकर वर्ष 2018 में अंचल प्रशासन को आवेदन दिया गया था।
इसमें बिहार सरकार के खेसरा 60 और 62 को अवैध कब्जा से मुक्त कराने के लिए आग्रह किया गया था। लेकिन अंचल प्रशासन की ओर से वर्ष 2023 के जुलाई माह में सिर्फ खेसरा 60 का नापी किया गया है जो गलत है। ग्रामीणों का कहना है कि नापी दोनों खेसरा का होना चाहिए। आपको बता दें, देशज टाइम्स किसकी जमीन, कौन मालिक, किसके जिम्मे, किसका कब्जा, इन बातों से कतई कोई सरोकार नहीं रखता।

