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दरभंगा में भी हैं ‘फूलन देवी’….जो ताबड़तोड़ गोलियां चलानें में हैं माहिर…यहां घर नहीं बनाते हथियार खरीदते हैं लोग

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दरभंगा, देशज टाइम्स अपराध ब्यूरो प्रमुख। संपूर्ण मिथिलांचल देवी का उपासक है। खासकर, दरभंगा एक ऐसा सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित है जो खुद में संपूर्ण राजधानी बनने की तमाम अहर्ता पूरी करने में सक्षम है। मगर, देवी तुल्य इस धरती पर अब फूलन देवी भी उग आईं हैं।

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यहां फूलन देवी की उस युग की हम बात कर रहे हैं जब वह हाथों में बंदूकें थामें बीहड़ की जंगलों में अपना साम्राज्य, पूरा हूकूमत चलाती थी। ऐसी ही हूकूमत अब दरभंगा के सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी दिखा है जब हाथों में बंदूक और तमंचा थामें महिलाएं ताबड़तोड़ गोलियां चलाने से ही नहीं बल्कि हत्या तक की वारदातों को अंजाम देने में नहीं झिझक रही।

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तय है, यह बदलाव समाज और दरभंगा की संपूर्ण शांतिप्रियता के लिए कतई उचित और सही नहीं है। बावजूद, पुलिस है, इससे निबटने को भी तैयार बैठी है। क्योंकि, पूरे दरभंगा जिले में भी कुछ ऐसा गांव है जहां महिलाएं भी गोलियां तड़तड़ा रही हैं। आप यकीं ना करें मगर यह यच है। सुनने में आपको अजीब लगेगा पर सच मानिए, सत्य यही है यहां भी कई महिलाएं फूलन देवी की राह पर चल पड़ी है। पढ़िए पूरी खबर

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दरभंगा का यह गांव कोई और नहीं सीमावर्ती इलाकों से जुड़ा सुदूर का इलाका वाला गांव है। दरभंगा, समस्तीपुर, खगड़िया और सहरसा जिला का सीमावर्ती क्षेत्र जिसका जुड़ाव दरभंगा से है, वहां वर्चस्व की लड़ाई में महिलाएं भी कूद पड़ी है।

कुछ दशक पहले तक यह इलाका माओवादियों की शरण स्थली हुआ करता था। लेकिन, अब वह बात नहीं हैं। लेकिन हां, यहां की आपसी वर्चस्व की लड़ाई ने लोगों के बीच दहशत जरूर पैदा कर दिया है।

जाति विशेष से जोड़कर देखा जाए तो मल्लाह और यादवों के बीच यहां खूनी संघर्ष चलता आ रहा है। इसके अंतर्गत कई सीमावर्ती गांव हैं। नदी के पास एक उजवा घाट हैं। इससे पूर्व में बसा गांव गईजोड़ी, फोदरा,रखटी, सिमरटोका, उजवा, अरथुआ, तिलकेश्वर आदि कई गांव हैं जो सीमावर्ती इलाके से जुड़ते हैं। और, आपराधिक घटनाओं के केंद्र हैं।

हजारों एकड़ में फैला यह दियारा क्षेत्र भी कहा जाता है। वैसे इन दिनों यह क्षेत्र वैसा दिखाई नहीं देता। हालांकि मक्के के फसलों के दौरान यहां विकराल रूप नजर आता है। और, इस सीजन में यहां अपहरण की घटनाएं ज्यादा घटती हैं।

सूत्रों का कहना हैं कि यहां फिरौती लेने का अंदाज भी कुछ अलग हैं, जिसकी जितनी औकाद हैं उस हिसाब से फिरौती लेकर अपराधी छोड़ भी देते हैं। पुलिस को पता नहीं चलता यहां तक कि कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं होता।

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इस कारण पुलिस भी चैन से सोती रहती हैं। मजेदार बात यह हैं कि यहां की महिलाएं भी गोली चलाने में पीछे नहीं हटती। कुछ वर्ष पहले सत्तू पहलवान की हत्या हुई। फिर उसके बेटे काजल यादव की हत्या हुई। कुछ साल के भीतर कई हत्याएं हुई। और हत्याएं वर्चस्व को लेकर हुई।

जमीन को जबरन जोतना या फिर जोतकर लगी हुई किसी के फसल को किसी के द्वारा काट लेना इनके जिंदगी एवं वर्चस्व का तरीका हैं। दरअसल यहां जितनी भी जमीन हैं। वह किसी ना किसी जमींदारों की हैं। लेकिन जमींदारो का कब्जा यहां चलता नहीं। कोई ना कोई उस जमीन पर कब्जा जमाये हुए हैं।

और, ऐसे कब्जाधारियों पर अपराधी तत्व के लोग या वर्चस्व स्थापित करने वाले लोग कब्जा जमाते हैं। इस कारण अक्सर लोग खूनी संघर्ष करते हैं। फिलहाल किरण देवी मुखिया एवं शंकर यादव के बीच वर्चस्व की लड़ाई हैं। यही नहीं आधा दर्जन लोग ऐसे हैं जो वर्चस्व को लेकर लड़ाई लड़ रहें हैं और इसी का शिकार रामजतन मुखिया का 19वर्षीय बेटा विजय मुखिया हुआ हैं जिसे बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी हैं।

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मजेदार बात यह भी है कि यहां इंदिरा आवास में मिलें पैसों से अधिकतर लोगों ने घर नहीं बनाया है। सूत्रों का कहना है कि इन पैसों से लोगों ने हथियार खरीदकर घर में जरूर रख लिया है। ऐसे मामलों में प्रशासन को चाहिए कि जांच कर इंदिरा आवास में लगे कर्मचारी, पंचायत सेवक, मुखिया और बीडीओ पर प्राथमिकी दर्ज कराना चाहिए ताकि सरकार से मिलें पैसों का सही इस्तेमाल हो।

सरकार की योजनाओं में यहां बड़े स्तर पर बंदरबांट होती हैं यह जांच का विषय हैं। इस संबंध में ओपी प्रभारी अजीत कुमार झा ने बताया कि विजय की हत्या के तीन आरोपी को गिरफ्तार किया हैं। आरोपी शंकर यादव फरार हैं। लेकिन, उसकी पत्नी और दोनों बेटियों को गिरफ्तार कर लिया गया हैं। डीएसपी मनीष चंद्र चौधरी ने आरोपियों को पकड़ने के लिए कमर कस लिया है। और, कार्रवाई की जा रही है।

ओपी अध्यक्ष अजीत कुमार झा ने बताया कि गिरफ्तार की गई अनीता देवी और उसकी दोनों बेटी काजल और मौसम गोली चलाने में माहिर हैं।

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