

बिरौल देशज टाइम्स डिजिटल डेस्क। राज्य सरकार के नगर विकास विभाग के निर्देश पर वर्ष 2017 में अनुमंडल प्रशासन की ओर से नगर परिषद बिरौल का भौगोलिक सीमा चयनित करते हुए परिसीमन तैयार किया गया था।
इस बीच नगर परिषद परिसीमन क्षेत्र में अवस्थित अफजला पंंचायत को ही सिर्फ नगर पंंचायत का दर्जा देते हुए इस क्षेत्र में नगर पंंचायत का चुनाव की तैयारी शुरू किए जाने से स्थानीय लोगों में सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पढ़िए उत्तम सेन गुप्ता की यह रिपोर्ट
इसको लेकर 20 जून को नगर परिषद निर्माण संघर्ष समिति की ओर से कवीर विद्यापीठ मे बैठक आयोजन कर आगे की रणनीति तैयारी की जाएगी। संघर्ष समिति के सचिव निलेश कुमार सोनी ने जानकारी देते हुए कहा कि वर्ष 2017 में सरकार के निर्देश के आलोक में अनुमंडल प्रशासन ने सुपौल, बिरौल, अफजला, डुमरी, उछटी,कसरौर करकौली पंंचायत के हिस्सों को जोड़ कर नगर परिषद का मैप तैयार कर जिला अधिकारी के माध्यम से सरकार को भेजा था।
राज्यपाल की ओर से इसका अधिसूचना भी जारी कर दिया गया, लेकिन गंदे राजनीति के तहत उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस मामले को लेकर पटना हाई कोर्ट में दर्ज सीडब्ल्यूजेसी 1669 चल रहा है। बावजूद नगर परिषद के परिसीमन के आधा हिस्से को नगर पंंचायत मे तब्दील कर दिया गया है।
न्यायालय का निर्णय आने से पहले ही नगर परिषद के परिसीमन के आधे हिस्से में नगर पंंचायत का चुनाव करना कानून को ताख पर रखने के बराबर ही नहीं बल्कि न्यायालय का अपमान किया जा रहा है। इन्हीं सब मामले को लेकर 20जून को बैठक आयोजित की जाएगी।
इसमें नगर परिषद निर्माण संघर्ष समिति के सभी सदस्यों की मौजूदगी में आगे की रणनीति बनाई जाएगी। अधिवक्ता गजेन्द्र प्रसाद के बताया कि न्यायालय के आदेश आने तक चुनाव आयोग को प्रतिक्षा करनी चाहिए।



